नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है, ताकि मिलकर ईरान से उत्पन्न खतरे का सामना किया जा सके। हालांकि उन्होंने किसी भी देश का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन संकेत दिए कि खाड़ी क्षेत्र के कुछ देश भी इस रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं। ये देश पहले से ही ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंतित रहे हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री ने दावा किया कि हाल के सैन्य अभियानों में ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर किया गया है। उनके अनुसार, “हमने उस तत्काल खतरे को काफी हद तक समाप्त कर दिया है, जिसमें ईरान परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस होने की कोशिश कर रहा था।” उन्होंने आगे कहा कि अब अगला कदम एक व्यापक क्षेत्रीय गठबंधन बनाना है, जिससे ईरान पर और दबाव डाला जा सके।
नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि युद्ध में इजरायल और अमेरिका को बढ़त हासिल है और यह संघर्ष अब अपने आधे से अधिक चरण को पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगातार निशाना बना रही है और उसके रणनीतिक ढांचे को कमजोर कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों के मारे जाने से उसके परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले जारी हैं। हालांकि अमेरिका की ओर से कई बार तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने की बात कही गई है, लेकिन इजरायल ने फिलहाल आक्रामक रुख बनाए रखने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल खाड़ी देशों के साथ औपचारिक या अनौपचारिक गठबंधन बनाने में सफल होता है, तो यह मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति को काफी हद तक बदल सकता है और ईरान पर बहुआयामी दबाव बढ़ा सकता है।