PNS खैबर MILGEM परियोजना के तहत तैयार किया गया है, जो तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह युद्धपोत मूल Ada-क्लास डिजाइन पर आधारित है, जिसे उन्नत कर करीब 3,000 टन वजनी मल्टी-रोल सतही युद्धपोत के रूप में विकसित किया गया है। इसकी लंबाई लगभग 108 मीटर है और इसमें CODAG प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो दो डीजल इंजन और एक गैस टर्बाइन पर आधारित है। इसकी अधिकतम गति करीब 31 नॉट और रेंज लगभग 3,500 नॉटिकल मील बताई जा रही है।
इस युद्धपोत को सतह, वायु और पनडुब्बी—तीनों तरह के खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसमें 3D सर्विलांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जो युद्ध के दौरान तेज और समन्वित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती हैं।
हथियारों की बात करें तो PNS खैबर में एंटी-शिप और लैंड-अटैक मिसाइलें, 12-सेल वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम, 76 मिमी मुख्य तोप और 324 मिमी टॉरपीडो ट्यूब लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें तुर्की का ADVENT कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, Smart MK2 रडार और HIZIR टॉरपीडो काउंटरमेजर्स भी शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह युद्धपोत स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे इसे रडार पर पकड़ना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। साथ ही इसमें ऐसे सिस्टम भी लगाए गए हैं जो दुश्मन के सिग्नलों को बाधित करने और हमलों से बचाव में मदद करते हैं। पाकिस्तान ने 2018 में तुर्की को चार कोरवेट बनाने का ऑर्डर दिया था, जिसमें PNS खैबर दूसरा युद्धपोत है। अन्य जहाज—PNS बदर और PNS तारिक—पर काम जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PNS खैबर पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में। हालांकि, भारतीय नौसेना की ताकत और आधुनिक हथियार प्रणालियों को देखते हुए क्षेत्रीय संतुलन पर इसका सीमित प्रभाव ही माना जा रहा है। कुल मिलाकर, PNS खैबर पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि है, जो तुर्की के साथ उसके बढ़ते रक्षा सहयोग को भी दर्शाता है।