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कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज, कई राज्यों में चुनाव से पहले बढ़ी चुनौतियां

Published on: February 17, 2026
Internal turmoil in Congress intensifies

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : तमिलनाडु में डीएमके के साथ सीट और पावर शेयरिंग को लेकर जारी खींचतान के बीच कांग्रेस पार्टी अलग-अलग राज्यों में अंदरूनी असहमति से भी जूझती नजर आ रही है। असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—इन चारों राज्यों में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और इसी बीच पार्टी के भीतर उठापटक तेज हो गई है।

असम: इस्तीफा और वापसी

असम में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल मचा दी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि राज्य इकाई में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे और उनकी जगह गौरव गोगोई को कमान सौंपी गई थी।
बोरा ने कहा कि उन्होंने 32 वर्षों तक पार्टी की सेवा की है और उनका कदम व्यक्तिगत नहीं बल्कि संगठन के भविष्य की चिंता से प्रेरित है। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया।

पश्चिम बंगाल: नेतृत्व को लेकर अलग राय

पश्चिम बंगाल में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे संजय बारू ने ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता बनाने की वकालत की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस राज्य में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। इससे विपक्षी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

तमिलनाडु: पावर शेयरिंग पर तनातनी

तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच पावर शेयरिंग को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस नेता सत्ताधारी डीएमके से नाराजगी जता रहे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पावर शेयरिंग से इनकार किया है। इस बीच अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी TVK के साथ संभावित तालमेल की चर्चाएं भी तेज हैं। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर की चेतावनी और डीएमके के पलटवार ने गठबंधन में तनाव को और स्पष्ट किया है।

केरल: अय्यर के बयान से दूरी

केरल में वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के उस बयान से हलचल मच गई, जिसमें उन्होंने पिनराई विजयन के दोबारा मुख्यमंत्री बनने का भरोसा जताया। कांग्रेस नेतृत्व ने इससे दूरी बनाते हुए इसे अय्यर की व्यक्तिगत राय बताया। पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि अय्यर पिछले कुछ वर्षों से पार्टी की सक्रिय भूमिका में नहीं हैं। कुल मिलाकर, चुनावी राज्यों में रणनीति और नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के सामने संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती साफ नजर आ रही है।


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