IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर और तटीय प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में इस बार सामान्य से अधिक दिनों तक लू चल सकती है। अनुमान है कि इन क्षेत्रों में लू का दौर सामान्य से 2 से 8 दिन ज्यादा लंबा हो सकता है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ेगी।
मौसम विभाग ने जिन राज्यों में लू का ज्यादा असर रहने की आशंका जताई है, उनमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तटीय तमिलनाडु और उत्तरी कर्नाटक शामिल हैं। दिल्ली-एनसीआर में भी इस बार लू वाले दिनों की संख्या अधिक रहने की संभावना है।
बारिश को लेकर IMD ने बताया कि अप्रैल महीने में उत्तर-पश्चिम भारत सहित कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। हालांकि, इसके बावजूद अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है, यानी रात में गर्मी से राहत कम मिलेगी। वहीं महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है।
मॉनसून को लेकर IMD ने फिलहाल कोई स्पष्ट पूर्वानुमान नहीं दिया है, लेकिन मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार अप्रैल से जून के बीच ENSO (एल नीनो-सदर्न ऑस्सिलेशन) की स्थिति सामान्य रहने की संभावना है। इसके बाद अल नीनो की स्थिति बनने की आशंका है, जिसका असर मॉनसून के अंतिम चरण—अगस्त और सितंबर—में बारिश पर पड़ सकता है।
वहीं मार्च महीने में असामान्य मौसम देखने को मिला। IMD के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान देश के कई राज्यों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 45 लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे ज्यादा 32 मौतें बिजली गिरने से हुईं। मार्च में कुल 8 पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जो सामान्य से अधिक हैं। इसके चलते उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बारिश की घटनाएं बढ़ीं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
IMD ने लोगों को गर्मी और लू से बचाव के लिए सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी है।