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पश्चिमी कमान पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, रक्षा सहयोग को लेकर बढ़ी चर्चा

Published on: February 17, 2026
American ambassador reached Western Command

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर सोमवार को भारतीय सेना की पश्चिमी कमान के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने चंडीगढ़ पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि वह वेस्टर्न कमांड जाने के लिए उत्साहित हैं।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब हाल के महीनों में कुछ मुद्दों को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में हल्की तल्खी देखी गई थी। हालांकि, गोर के सक्रिय कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों देशों के रणनीतिक हितों में फिर से सामंजस्य दिखाई दे रहा है।

सैन्य गतिविधियों के बीच दौरा

गौरतलब है कि पश्चिमी कमान में हाल ही में ‘अश्नी प्रहार’ अभ्यास के तहत अश्नी प्लाटून की सर्विलांस और टारगेटिंग क्षमताओं का सफल परीक्षण किया गया। आधुनिक शॉर्ट-रेंज सर्विलांस सिस्टम और मानवरहित एरियल सिस्टम (UAS) से लैस टीमों ने सटीक और त्वरित हमले की क्षमता का प्रदर्शन किया। ऐसे परिदृश्य में अमेरिकी राजदूत का दौरा रक्षा सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रक्षा साझेदारी पर जोर

रविवार को ही सर्जियो गोर ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो का स्वागत किया था। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रक्षा भागीदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, भारतीय सेना या अमेरिकी दूतावास की ओर से इस विशेष दौरे पर अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

रणनीतिक दृष्टि से अहम पश्चिमी कमान

पश्चिमी कमान भारतीय सेना की प्रमुख कमानों में से एक है, जिसकी जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब के फाजिल्का क्षेत्र तक फैली सीमा की सुरक्षा है। पाकिस्तान से लगती सीमा के कारण यह कमान सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बढ़ता रक्षा सहयोग

हाल ही में नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को लेकर बैठकें हुई थीं। यह चर्चा इंडो-यूएस मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत आयोजित की गई। इससे पहले भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी अमेरिका दौरे पर गए थे, जहां समुद्री सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत हुई थी। विश्लेषकों का मानना है कि सर्जियो गोर की सक्रिय भूमिका और उच्चस्तरीय सैन्य संपर्क दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं।


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