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भारत-रूस रक्षा सहयोग को मजबूती: S-400 के दो स्क्वाड्रन और 288 मिसाइल खरीद को मंजूरी

Published on: February 14, 2026
Strengthening India-Russia defense cooperation

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारत और रूस के रक्षा संबंधों को लेकर लगातार दो दिनों में दो अहम और सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। 12 फरवरी 2026 को जानकारी मिली कि रूस इस वर्ष S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के शेष दो स्क्वाड्रन भारत को सौंप देगा। इसके अगले ही दिन 13 फरवरी 2026 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने S-400 सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली 288 सरफेस-टू-एयर मिसाइलों की खरीद को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) दे दी।

10,000 करोड़ रुपये का सौदा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC ने फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP) के तहत इन मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह सौदा करीब 10,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। प्रस्ताव के तहत 120 कम दूरी (शॉर्ट रेंज) और 168 लंबी दूरी (लॉन्ग रेंज) की मिसाइलें खरीदी जाएंगी।

S-400 की मारक क्षमता और रेंज

S-400 ट्रायंफ सिस्टम दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। इसमें 40 किमी, 150 किमी, 200 किमी और 400 किमी रेंज तक की मिसाइलें शामिल होती हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 4.8 किलोमीटर प्रति सेकंड (मैक 14) बताई जाती है। यह प्रणाली 30 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।

शेष स्क्वाड्रन की डिलीवरी

रूस पहले ही पांच स्क्वाड्रन में से तीन भारत को सौंप चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चौथा स्क्वाड्रन जून तक और पांचवां नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है।

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में भूमिका

भारतीय सशस्त्र बलों ने पूर्व में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान S-400 प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस सिस्टम ने दुश्मन के कई लड़ाकू विमानों, निगरानी विमानों और ड्रोन को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई मिसाइलों की खरीद से वायु रक्षा कवच और मजबूत होगा तथा देश की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


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