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ओम बिरला को हटाने के नोटिस पर विपक्ष घिरा, 119 सांसदों के प्रस्ताव में गंभीर खामियां

Published on: February 12, 2026
Notice for removal of Om Birla
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष के 119 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए दिया गया नोटिस अब खुद विवादों में घिर गया है। इस नोटिस में कई गंभीर तकनीकी और तथ्यात्मक त्रुटियां सामने आई हैं, जिसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या विपक्ष ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था के शीर्ष पद से जुड़े संवैधानिक प्रक्रिया की गंभीरता को ठीक से समझा भी है या नहीं।
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नोटिस में कई जगहों पर फरवरी 2025 की घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जबकि मामला मौजूदा कार्यकाल से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि नोटिस में एक-दो नहीं बल्कि चार बार ऐसी तारीखों का जिक्र है, जो प्रक्रिया को कमजोर बनाती हैं। लोकसभा के नियमों के अनुसार, इस तरह की त्रुटियों के आधार पर नोटिस को खारिज भी किया जा सकता है।
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि नोटिस में जो भी त्रुटियां हैं, उन्हें नियमों के तहत ठीक करवाया जाए और उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए। स्पीकर ने कहा है कि मामले में नियमों के अनुरूप और तय प्रक्रिया के अनुसार तेजी से कार्रवाई की जाए। जानकारी के मुताबिक, यह नोटिस बजट सत्र के दूसरे चरण के समाप्त होने के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा।
लोकसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संशोधित और त्रुटिरहित नोटिस मिलने के बाद ही उसे निर्धारित नियमों के तहत जांच के लिए लिया जाएगा। इसके बाद यह तय होगा कि प्रस्ताव आगे बढ़ेगा या नहीं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नोटिस में गलती सामने आई हो। मंगलवार को जब यह नोटिस पहली बार लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया था, तब उसमें वर्ष 2026 की जगह 2025 लिखा हुआ था। बाद में इसे संशोधित कर 2026 किया गया, लेकिन अब सामने आया है कि उसमें पिछले वर्ष की घटनाओं से जुड़ी तारीखें अब भी दर्ज हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में विपक्ष के कई बड़े और अनुभवी नेता शामिल हैं। केसी वेणुगोपाल, टीआर बालू, गौरव गोगोई, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव, आदित्य यादव, कुमारी शैलजा, शशि थरूर, अक्षय यादव, मीसा भारती और तारिक अनवर जैसे दिग्गज सांसदों के हस्ताक्षर होने के बावजूद इतनी स्पष्ट खामियां रह जाना विपक्ष की तैयारी और गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।

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