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एर्दोगन का बड़ा यू-टर्न: सऊदी अरब और मिस्र से मेल-मिलाप, मिडिल ईस्ट में नए सुपर-गठबंधन के संकेत

Published on: February 8, 2026
Erdogan's big U-turn Saudi Arabia
द देवरिया न्यूज़,रियाद/काहिरा : तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने वर्षों पुरानी तल्खी को पीछे छोड़ते हुए सऊदी अरब और मिस्र के साथ रिश्तों को नई दिशा देने की पहल की है। इसे मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़े बदलाव और संभावित क्षेत्रीय सुपर-गठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एर्दोगन मंगलवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे, जहां उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इस मुलाकात को MENA क्षेत्र की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच नए सहयोग की शुरुआत बताया जा रहा है।
सऊदी दौरे के बाद एर्दोगन मिस्र पहुंचे, जहां उनकी राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात प्रस्तावित है। इस दौरान ‘मिस्र-तुर्की उच्चस्तरीय रणनीतिक सहयोग परिषद’ की बैठक और तुर्की-मिस्र बिजनेस फोरम का आयोजन किया जा रहा है। मिस्र को उम्मीद है कि इस पहल से 2026 तक तुर्की से करीब 15 अरब डॉलर का निवेश आएगा। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग से जुड़े एक फ्रेमवर्क समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसे संभावित रणनीतिक साझेदारी की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल, तुर्की के सऊदी अरब और मिस्र से रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं। अरब स्प्रिंग के दौरान एर्दोगन सरकार के समर्थन से खाड़ी देशों और मिस्र में नाराजगी बढ़ी थी। 2013 में मिस्र में तख्तापलट के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड के कई नेता तुर्की चले गए, जिससे काहिरा और रियाद दोनों नाराज हुए। इसके अलावा सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद तुर्की-सऊदी संबंध बेहद खराब हो गए थे।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात ने समीकरण बदल दिए हैं। 2022 के बाद से एर्दोगन और सऊदी नेतृत्व के बीच संवाद बढ़ा, वहीं 2024 में एर्दोगन की काहिरा यात्रा ने तुर्की-मिस्र संबंधों में नया अध्याय खोला। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के बीच बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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