द देवरिया न्यूज़ : भारत को हमेशा युद्ध जैसी किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि सीमाओं पर हालात कभी भी बदल सकते हैं — यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि अप्रत्याशित परिस्थितियां किसी भी समय पैदा हो सकती हैं। इस दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के लिए एक “केस स्टडी” की तरह है, जिससे भविष्य की सुरक्षा नीतियों को दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में भारत ने स्वदेशी सैन्य उपकरणों का प्रभावी इस्तेमाल कर अपनी तकनीकी क्षमता और सामरिक तैयारी का प्रदर्शन किया।
स्वदेशी रक्षा क्षमता पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में ‘आत्मनिर्भरता’ और ‘स्वदेशीकरण’ ही भारत की सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और कई क्षेत्र अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करना होगा।
उन्होंने बताया कि आकाश मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस, आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स की प्रभावशीलता दुनिया ने “ऑपरेशन सिंदूर” में देखी।
रक्षा उद्योग को बताया ‘चौथा स्तंभ’
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय सिर्फ तीनों सेनाओं को नहीं, बल्कि उन “इंडस्ट्री वारियर्स” को भी जाता है जिन्होंने रक्षा उत्पादन में नवाचार, डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग अब सुरक्षा प्रणाली का चौथा स्तंभ बन चुका है।
सरकार घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समान अवसर का वातावरण बना रही है, ताकि देश के उद्योग ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ की भावना के साथ आगे बढ़ सकें।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि
रक्षा मंत्री ने बताया कि 2014 से पहले भारत पूरी तरह रक्षा आयात पर निर्भर था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
2014 में देश का रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
इसमें 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र से है।
रक्षा निर्यात, जो 10 वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये से कम था, अब बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने भरोसा जताया कि मार्च 2026 तक भारत का रक्षा निर्यात 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
भविष्य के लिए नवाचार ही आधार
राजनाथ सिंह ने कहा कि क्वांटम मिशन, अटल इनोवेशन मिशन और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसे कार्यक्रम देश में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही पहलें भारत की भावी सैन्य ताकत का आधार बनेंगी और देश को “सुरक्षित, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्व वाला राष्ट्र” बनाएंगी।
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