द देवरिया न्यूज़ बनवारी टोला (कुशीनगर)। कसया क्षेत्र में बेटियों ने अपने कर्तव्य और प्रेम का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने परंपराओं को एक नई दिशा दी। कसया निवासी दिव्या ने अपने पिता की अंतिम क्रिया में बेटे की भूमिका निभाते हुए मुखाग्नि दी और यह साबित किया कि कर्तव्य सिर्फ परंपरा नहीं, भावना और श्रद्धा का विषय होता है। 65 वर्षीय राम सहाय प्रसाद, जो कसया में व्यवसायी थे, लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार रात उनका निधन हो गया। उनकी तीन बेटियां हैं—दिव्या, खुशी और अदिति—और कोई पुत्र नहीं है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी बेटों पर मानी जाती है, लेकिन इस परिवार ने समाज की इस सोच को चुनौती दी।
मंगलवार सुबह जब अंतिम यात्रा की तैयारी हुई, तो दिव्या ने सफेद धोती की जगह सफेद सूट पहनकर पिता की अर्थी को कंधा दिया। तीनों बहनों ने पूरी विधिविधान के साथ अंतिम यात्रा निकाली और रामाभार पुल स्थित मुक्तिधाम पहुंचीं। वहाँ बड़ी बेटी दिव्या ने पिता को मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति इस भावुक क्षण को देखकर भावुक हो गया। समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर नई सोच का यह उदाहरण प्रेरणादायक बन गया है।
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