द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : संसद की एक महत्वपूर्ण समिति ने केंद्र सरकार को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत मजदूरी भुगतान प्रणाली में बदलाव करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि आधार-आधारित पेमेंट सिस्टम (ABPS) को अनिवार्य रखने के बजाय वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों को भुगतान प्राप्त करने में आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सके।
दरअसल, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जनवरी 2024 से मनरेगा के तहत आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य कर दिया था। सरकार का तर्क था कि इस प्रणाली से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लाभार्थियों के खातों में सीधे भुगतान सुनिश्चित होगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मजदूरों के लिए।
संसदीय स्थायी समिति, जो ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित है, ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आधार आधारित भुगतान प्रणाली के कारण कई श्रमिकों को मजदूरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बुजुर्ग श्रमिकों और उन इलाकों के लोगों को परेशानी हो रही है, जहां बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट या अन्य पहचान प्रक्रिया) सही तरीके से काम नहीं कर पाता।
समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को इस प्रणाली को लचीला बनाना चाहिए और मजदूरों को अन्य विकल्प भी उपलब्ध कराने चाहिए। पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) के माध्यम से किया जाता था, जो एक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है। समिति का मानना है कि NACH या अन्य वैकल्पिक माध्यमों को फिर से सक्रिय और सुलभ बनाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे मजदूरों को भुगतान के लिए तकनीकी अड़चनों का सामना न करना पड़े। खासकर उन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है या आधार से जुड़े प्रमाणीकरण में बार-बार विफलता होती है, वहां वैकल्पिक भुगतान प्रणाली बेहद जरूरी है।
समिति ने जोर देकर कहा कि मनरेगा जैसी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे में यदि भुगतान प्रणाली ही जटिल और बाधित करने वाली बन जाए, तो इसका सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि भुगतान प्रणाली सरल, भरोसेमंद और सभी के लिए सुलभ हो।
सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करेगी और मनरेगा श्रमिकों के हित में आवश्यक सुधार करेगी, ताकि योजना का लाभ बिना किसी बाधा के जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
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