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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़: 20 साल बाद एक साथ आए ठाकरे भाई, शिवसेना (UBT)–मनसे गठबंधन का ऐलान

Published on: December 25, 2025
Big turning point in Maharashtra politics

द देवरिया न्यूज़,मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर साथ नजर आए। मुंबई के वरली स्थित होटल ब्लू में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया गया।

गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों भाई अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के स्मृति स्थल पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने एक ही माइक से अपनी बात रखी, जो राजनीतिक रूप से बेहद प्रतीकात्मक माना जा रहा है।


बीजेपी पर उद्धव का हमला, राज ठाकरे का मराठी मेयर पर जोर

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि “दिल्ली में बैठे लोग महाराष्ट्र से मुंबई को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं,” और कहा कि उनकी ताकत से ऐसे मंसूबों को नाकाम किया जाएगा।

वहीं, राज ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि अगला मुंबई मेयर मराठी होगा और हमारा होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा महत्व विचार और उद्देश्य का है।


सीट बंटवारे का ऐलान क्यों नहीं हुआ? तीन बड़े कारण

हालांकि शिवसेना (यूबीटी)–मनसे गठबंधन का ऐलान हो गया, लेकिन मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 सीटों पर सीट शेयरिंग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इसके पीछे तीन प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं—

1. रणनीतिक दबाव की राजनीति

बीएमसी चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक बीजेपी–शिवसेना (शिंदे गुट)–महायुति ने भी सीट बंटवारे का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में ठाकरे भाइयों द्वारा सीटों की संख्या सार्वजनिक न करना विपक्षी खेमे को असमंजस में रखने की रणनीति माना जा रहा है।

2. विपक्षी एकजुटता की संभावना

कांग्रेस ने फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। यदि कांग्रेस अलग रहती है, तो मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका है, जिसका असर शिवसेना (यूबीटी)–मनसे गठबंधन पर पड़ सकता है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस और शरद पवार गुट की एनसीपी भविष्य में इस गठबंधन से जुड़ सकती हैं। सीटों की घोषणा टालकर ठाकरे भाइयों ने अपने विकल्प खुले रखे हैं।

3. सीटों पर अंतिम सहमति अभी बाकी

सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच करीब 150 सीटों पर सहमति बन चुकी है, जबकि शेष 77 सीटों को लेकर बातचीत जारी है। खासकर मराठी बहुल इलाकों में दोनों पार्टियों के नेताओं की दावेदारी के चलते अंतिम फैसला अभी नहीं हो पाया है।


आगे की रणनीति पर टिकी निगाहें

ठाकरे भाइयों की यह साझा पहल बीएमसी चुनावों को लेकर राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीट बंटवारे को लेकर अंतिम घोषणा कब होती है और क्या अन्य विपक्षी दल भी इस गठबंधन का हिस्सा बनते हैं।


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