द देवरिया न्यूज़,मेरठ। नौचंदी थाना क्षेत्र स्थित शुभकामना अस्पताल में बीमा कंपनियों से फर्जी क्लेम वसूली के बड़े रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों, डॉक्टरों और टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) कर्मचारियों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, सितंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच 100 से अधिक फर्जी मरीजों के नाम पर करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम पास कराए गए।
बिना भर्ती और बिना सर्जरी के पास कराए गए क्लेम
बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर सुधीर मिश्रा ने जांच के दौरान पाया कि शुभकामना अस्पताल में कई मरीजों को कागजों में भर्ती दिखाया गया, जबकि वे कभी अस्पताल आए ही नहीं। कुछ मामलों में बिना किसी सर्जरी के ही ऑपरेशन दर्शाकर क्लेम स्वीकृत करा लिया गया।
बीमा कंपनी की आंतरिक जांच में दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर मिलने पर पूरे मामले की शिकायत एसएसपी मेरठ से की गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
अस्पताल का संचालन और हिस्सेदारी का खुलासा
आरटीओ रोड स्थित शुभकामना अस्पताल के मूल मालिक कामिल और मुस्तकीम बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, उस समय अस्पताल का संचालन—
मीनू मलिक – 50% हिस्सेदारी
अख्तर (झोलाछाप डॉक्टर) – 25%
इमरान – 25%
के पास था। इसी प्रबंधन के दौरान फर्जी बीमा क्लेम घोटाले को अंजाम दिया गया।
कागजों में मरीज, हकीकत में अस्पताल से कोई वास्ता नहीं
पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।
राजीव अरोड़ा (पूर्वी दिल्ली) को कागजों में भर्ती दिखाकर सर्जरी तक दर्शा दी गई, जबकि वह कभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए।
इसी तरह करोल बाग निवासी कपिल जैन और नेहा नाम की महिला को भी मरीज दिखाकर बीमा कंपनियों से क्लेम वसूला गया।
हर महीने 25–30 फर्जी क्लेम पास कराने की बात कबूली
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि टीपीए कर्मचारी अवी कुमार और संदीप शर्मा से पूछताछ में खुलासा हुआ कि बीते पांच महीनों में हर महीने 25 से 30 फर्जी क्लेम पास कराए गए। इसके बाद अस्पताल संचालक मीनू मलिक के पति अमित मलिक, हिस्सेदार इमरान और अन्य कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया।
फर्जी क्लेम की रकम ऐसे होती थी बांटी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि क्लेम की रकम को पहले से तय हिस्सेदारी के अनुसार बांटा जाता था—
25% — फर्जी मरीज
10% — टीपीए कर्मचारी
10% — पैथोलॉजिस्ट
10% — डॉक्टर
45% — अस्पताल प्रबंधन
टीपीए के जरिए फर्जी बिल तैयार किए जाते थे और डॉक्टर व पैथोलॉजिस्ट मरीजों की फाइल बनाकर क्लेम प्रक्रिया पूरी करते थे।
नेटवर्क की गहराई से जांच, CDR और बैंक लेनदेन खंगाले जा रहे
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि अब इस पूरे नेटवर्क में अस्पताल के मूल मालिक कामिल और मुस्तकीम की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी क्लेम की रकम में उनका कितना हिस्सा था और क्या वे शुरुआत से इस घोटाले से वाकिफ थे।
पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही, फर्जी क्लेम लेने वाले सभी लाभार्थियों की सूची तैयार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अस्पताल संचालक ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, शुभकामना अस्पताल की संचालक मीनू मलिक ने खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह मामला करीब 10 महीने पुराना है और टीपीए कर्मचारियों ने उनकी जानकारी के बिना फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बीमा कंपनियों के कर्मचारी बिना मरीज देखे क्लेम स्वीकृत करते हैं, तो उनकी भूमिका की जांच भी होनी चाहिए।
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