द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के गाजा को लेकर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय योजना में शामिल होने की खबरों के बाद देश के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, असीम मुनीर अमेरिका के साथ मिलकर गाजा में हजारों पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती की योजना पर काम कर रहे हैं। यह तैनाती प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) के तहत हो सकती है, जिसका उद्देश्य हमास को हथियार सरेंडर कराने और युद्ध के बाद गाजा में सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना बताया जा रहा है।
ISF को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थित 20-पॉइंट पीस प्लान का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इस योजना को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखा विरोध शुरू हो गया है।
कराची में शीर्ष धार्मिक नेताओं की आपात बैठक
इसी सप्ताह सोमवार को कराची में पाकिस्तान के वरिष्ठ इस्लामिक विद्वान मुफ्ती तकी उस्मानी की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में देवबंदी, बरेलवी, अहल-ए-हदीस और शिया विचारधाराओं के प्रमुख मौलाना शामिल हुए। इसके साथ ही धार्मिक-राजनीतिक दलों जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) और जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में गाजा को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पर गहरी चिंता जताई गई।
“हमास को निहत्था करने के लिए सेना भेजने का दबाव”
संयुक्त बयान में कहा गया कि इजरायल-हमास संघर्षविराम के बाद अब मुस्लिम देशों पर गाजा में सुरक्षा बल भेजने और हमास को निहत्था करने का दबाव बढ़ाया जा रहा है। बयान के मुताबिक,
“कई मुस्लिम देश पहले ही इस तरह की तैनाती से इनकार कर चुके हैं, लेकिन अब पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपनी सेना भेजे।”
पाकिस्तानी मौलानाओं ने इसे गंभीर और संवेदनशील मामला बताते हुए कहा कि किसी भी सूरत में पाकिस्तान को ऐसे मिशन का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
ISF को लेकर पाकिस्तान का रुख अस्पष्ट
इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) को गाजा शांति योजना का अहम स्तंभ माना जा रहा है, जिसमें मुस्लिम देशों के सैनिकों की भागीदारी प्रस्तावित है। इससे पहले इस्लामाबाद संकेत दे चुका है कि वह ISF में शामिल होने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निहत्था करने की किसी भी कार्रवाई में शामिल नहीं होगा।
उधर, हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या इस महीने स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन अपने हथियार रखने के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। वहीं, इजरायल लगातार हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण की मांग करता रहा है।
“अमेरिकी दबाव के आगे न झुके सरकार”
कराची बैठक में शामिल मौलानाओं और नेताओं ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि वह वॉशिंगटन या किसी अन्य देश के दबाव में आकर गाजा में सैनिक न भेजे। बयान में कहा गया,
“यह बैठक पाकिस्तान सरकार से पूरी मजबूती के साथ मांग करती है कि वह हमास को निहत्था करने के लिए अपनी सेना भेजने के किसी भी प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज करे।”
बैठक में फिलिस्तीन की आजादी के लिए समर्थन दोहराया गया और इसे हर मुसलमान का धार्मिक व नैतिक कर्तव्य बताया गया।
गाजा को लेकर असीम मुनीर की कथित रणनीति जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की भूमिका बढ़ाने की कोशिश मानी जा रही है, वहीं देश के भीतर धार्मिक और राजनीतिक वर्ग इसे खतरनाक और अस्वीकार्य हस्तक्षेप मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की घरेलू राजनीति और विदेश नीति—दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
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