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सुप्रीम कोर्ट में CJI भूषण रामकृष्ण गवई पर जूता फेंकने का प्रयास, CJI ने रखी शांति — आरोपी वकील निलंबित

Published on: October 7, 2025
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नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट | एक चौंकाने वाली घटना में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान किसी वकील ने मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। इस घटना के बीच न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन भी उसी पीठ पर थे।

घटना उस समय हुई जब अदालत में ‘मौखिक उल्लेख’ (oral mentioning) की प्रक्रियाएँ चल रही थीं। सुबह 11:30 बजे सुनवाई शुरू हुई — यह समय सामान्य से लगभग एक घंटे बाद था क्योंकि अदालत सप्ताह भर की छुट्टियों के बाद खुली थी। उस दिन कई अति आवश्यक मामलों को सूचीबद्ध किया गया था। जब अधिवक्ता शिवम सिंह अपने मामले को तात्कालिक सूची में रखने का अनुरोध कर रहे थे, उसी समय बाईं ओर से एक जूता फेंकने का प्रयास किया गया। न्यायाधीश उस वक्त दाईं ओर मुड़े हुए थे।

आश्चर्य जताते हुए CJI गवई ने शांतचित्त होकर कहा, “Don’t get distracted by all this. We are not distracted. These things do not affect me.” उन्होंने उपस्थित अधिवक्ताओं को भी कहा कि वे अपना उल्लेख जारी रखें।

वकील शिवम सिंह ने बाद में कहा कि “मैं न्यायाधीशों से ज़्यादा घबरा गया था, लेकिन उनकी संयम की प्रतिक्रिया वास्तव में प्रभावशाली थी।”

सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उस व्यक्ति — जिसकी पहचान दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता राकेश किशोर के रूप में हुई — को पकड़ लिया। बताया गया कि वह “सनातन” के समर्थन में नारे लगा रहा था। यह भी सामने आया है कि उसने अपने खेल के जूते उतारकर उन्हें फेंकने की भी कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे तुरंत रोक लिया।

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इस मामले को सम्भवत: मुख्य न्यायाधीश गवई द्वारा पहले दिए गए बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से खजुराहो विष्णु प्रतिमा पुनर्स्थापन मामले में उन्होंने कहा था कि इस तरह की याचिका “शो-इंटरेस्ट” हो सकती है और “पूजा करके देखिये” जैसा तर्क प्रस्तुत किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय धर्मों का अपमान नहीं करना था और उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

Bar Council और अन्य संगठन समर्थनः
– बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तत्काल प्रभाव से अधिवक्ता राकेश किशोर को निलंबित कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि उनका व्यवहार न्यायालय की गरिमा के अनुकूल नहीं था। 
– सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने इस कृत्य की निंदा की और सुप्रीम कोर्ट से सुओ मोटु संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अपील की है। 

पृष्ठभूमि एवं इतिहास:
इस तरह की घटनाएँ नई नहीं हैं। वर्ष 2009 में एक महिला ने न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत पर सुनवाई के दौरान चप्पल फेंकी थी, लेकिन चप्पल न्यायाधीश को नहीं लगी क्योंकि उन्होंने समय रहते झुककर बचाव किया। उस महिला को तत्काल हिरासत में ले लिया गया था।

यह घटना अदालतों की सुरक्षा, न्यायालयीन गरिमा और वकील-न्यायाधीश संबंधों की सीमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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