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संचार साथी ऐप विवाद पर केंद्र का बयान: ऐप अनिवार्य नहीं, विपक्ष का ‘जासूसी’ आरोप गलत—सिंधिया

Published on: December 3, 2025
Sanchar Saathi app centers on controversy

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: संचार साथी ऐप को लेकर विपक्ष के तीखे आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह ऐप फोन में इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं है। उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से इसे कभी भी डिलीट कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विपक्ष के आरोपों को “राजनीतिक एजेंडा” बताया है।

“जब चाहें ऐप डिलीट करें” — सिंधिया

मंगलवार को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष कुर्सी के लिए मुद्दे ढूंढ रहा है और जनता को भ्रमित कर रहा है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी है कि भ्रम को दूर किया जाए।
उन्होंने कहा, “भारत में 2024 में 22,800 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ। इस तरह के साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए ही संचार साथी ऐप आम नागरिकों को दिया गया है। जो इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं करें, और जो नहीं करना चाहते वे इसे डिलीट कर सकते हैं।”

“करो तो मरो, न करो तो मरो” — विपक्ष पर कटाक्ष

सिंधिया ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा, “एक ओर विपक्ष कहता है कि सरकार फ्रॉड रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही, और जब सरकार ऐप के जरिए कदम उठाती है, तो आपत्ति करते हैं। विपक्ष पेगासस का नाम लेकर डर फैलाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ करो तो मरो, दूसरी तरफ न करो तो मरो। जो लोग सत्य नहीं देखना चाहते, उन्हें सत्य नहीं दिखाया जा सकता।”

विपक्ष ने ऐप को बताया ‘जासूसी उपकरण

कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से कहा कि ‘संचार साथी’ एक जासूसी ऐप है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नागरिकों की निजता का हनन करता है।
प्रियंका गांधी ने कहा, “यह एक जासूसी ऐप है। अब वे और क्या जानना चाहते हैं? नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है। यह सामान्य बात है कि हम बिना सरकारी निगरानी के परिवार और दोस्तों को संदेश भेज सकें। सरकार हर तरीके से देश को तानाशाही की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है।”

केंद्र और विपक्ष के बीच यह विवाद फिलहाल जारी है, जबकि सरकार लगातार दावा कर रही है कि यह ऐप केवल साइबर फ्रॉड के खिलाफ सुरक्षा उपकरण है, न कि निगरानी का माध्यम।


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