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रूस का Su-57 ऑफर ठंडे बस्ते में? भारत क्यों नहीं दिखा रहा दिलचस्पी

Published on: March 30, 2026
Russia's Su-57 offer shelved
द  देवरिया न्यूज़,मॉस्को : चीन और पाकिस्तान के साथ जारी रणनीतिक तनाव के बीच भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को मजबूत कर रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने कई बड़े रक्षा खरीद समझौतों को मंजूरी दी है, जिनमें ट्रांसपोर्ट विमान, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक तोप, गोला-बारूद और ड्रोन शामिल हैं। इससे पहले भारतीय नौसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमान और P-8I समुद्री गश्ती विमान की खरीद के लिए करीब 40 बिलियन डॉलर के सौदे को भी हरी झंडी दी जा चुकी है।
इन फैसलों के बीच एक अहम सवाल बार-बार उठ रहा है कि भारत अपनी हवाई क्षमता बढ़ाने के लिए रूस के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट सुखोई Su-57 पर दांव क्यों नहीं लगा रहा। वहीं, यह भी चर्चा है कि भारत जल्द ही 114 राफेल लड़ाकू विमानों का नया ऑर्डर दे सकता है।
रूस पिछले एक साल से भारत को Su-57 के लिए आकर्षक ऑफर दे रहा है। मॉस्को ने न केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, बल्कि इस विमान के भारत में निर्माण की भी पेशकश की है। इसके साथ ही रूस ने Su-57 का सोर्स कोड साझा करने का वादा किया है, ताकि भारत अपनी जरूरतों के अनुसार इसमें बदलाव कर सके। रूस ने भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA कार्यक्रम में सहयोग की पेशकश भी की है।
रूस की सरकारी हथियार निर्यात एजेंसी Rosoboronexport ने नवंबर 2025 में अपने प्रस्ताव को और विस्तार देते हुए फुल लाइसेंस प्रोडक्शन और संभावित दो सीटों वाले Su-57 वेरिएंट की पेशकश की थी। रूस का दावा है कि यह एडवांस वर्जन ड्रोन स्वार्म को नियंत्रित करने में सक्षम होगा, जिससे युद्ध के मैदान में इसकी क्षमता और बढ़ेगी। साथ ही, Su-30MKI के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर भारत में इसका उत्पादन कर लागत कम करने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इन तमाम प्रस्तावों के बावजूद भारतीय वायुसेना ने Su-57 को लेकर अब तक कोई ठोस रुचि नहीं दिखाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मुख्य वजह विमान की वास्तविक क्षमताओं को लेकर संदेह है। रूस जहां इसे अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, शक्तिशाली इंजन, AESA रडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस बताता है, वहीं भारत इन दावों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
इसके अलावा, अमेरिका के CAATSA कानून के तहत संभावित प्रतिबंधों का खतरा भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है। यदि भारत रूस से यह डील करता है, तो इससे उसके अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि रूस द्वारा प्रस्तावित दो सीटों वाला Su-57 वेरिएंट अभी विकास के चरण में है और इसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पहली उड़ान भरने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, भारत फिलहाल Su-57 को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है और अपनी रक्षा जरूरतों के लिए ज्यादा भरोसेमंद और पहले से परीक्षण किए जा चुके प्लेटफॉर्म—जैसे राफेल—की ओर झुकाव दिखा रहा है।

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