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पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारी में बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक दांव, सांसद-विधायकों को सौंपी गई बूथ से लेकर जोन तक की जिम्मेदारी

Published on: December 13, 2025
Preparation for West Bengal elections

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं, ताकि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके। राज्य को पांच जोन में बांटते हुए प्रत्येक जोन की निगरानी के लिए दूसरे राज्यों के वरिष्ठ नेताओं को तैनात किया गया है।

पिछली गलतियों से सीख, बाहरियों पर कम निर्भरता

बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव की कमियों से सबक लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने माना है कि पिछली बार टीएमसी से बड़ी संख्या में नेताओं को पार्टी में शामिल कर उन्हें टिकट देने से पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई, जिसका नुकसान चुनावी नतीजों में देखने को मिला। इस बार टिकट वितरण में स्थानीय और पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर रहेगा।

शक्ति केंद्र मॉडल पर फोकस

पार्टी ने पांच से छह बूथों को मिलाकर ‘शक्ति केंद्र’ बनाए हैं। हर शक्ति केंद्र की जिम्मेदारी सांसदों, विधायकों, संगठन पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके क्षेत्र में बीजेपी को सबसे ज्यादा वोट मिले। इसके लिए स्थानीय स्तर पर संपर्क और प्रचार की रणनीति तैयार करने की छूट भी दी गई है।

बूथ कमेटियों की जांच और लाभार्थियों की सूची

बीजेपी के पश्चिम बंगाल के सांसद मनोज तिग्गा ने बताया कि शक्ति केंद्र प्रभारी यह जांच कर रहे हैं कि बूथ कमेटियां सक्रिय हैं या नहीं। साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की सूची तैयार की जा रही है। यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद जनवरी से लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में केंद्र की योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ राज्य सरकार की विफलताओं और कथित घोटालों को भी उजागर किया जाएगा।

जोन और जिलों की निगरानी बाहरी नेताओं के हाथ

सूत्रों के अनुसार, बंगाल को पांच जोन और कामकाज के लिहाज से 43 जिलों में बांटा गया है। जोन और जिलों की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों के अनुभवी नेताओं को दी गई है, जो संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे और सीधे केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेंगे। कुछ जिलों में तैनाती हो चुकी है, जबकि बाकी में जल्द नियुक्तियां की जाएंगी।

बीजेपी का मानना है कि इस बार मजबूत संगठनात्मक ढांचे और जमीनी तैयारी के दम पर वह पश्चिम बंगाल में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी।


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