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संगठित और हार्डकोर अपराधों की जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को सुझाव

Published on: December 17, 2025
of organized and hardcore crimes

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को सुझाव दिया कि केंद्रीय कानूनों के तहत दर्ज ऐसे गंभीर मामलों, जिनमें ‘संगठित, पेशेवर और हार्डकोर’ अपराधी शामिल हों, उनकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई एनआईए की विशेष अदालतों में कराई जा सकती है। साथ ही केंद्र सरकार को इस दिशा में उपयुक्त कानून बनाने पर विचार करने का सुझाव दिया गया।

गंभीर आपराधिक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों को दिल्ली स्थित उन अदालतों में स्थानांतरित किया जा सकता है, जिन्हें विशेष रूप से एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए गठित किया गया है। जस्टिस बागची ने एनआईए अधिनियम की धारा 6 का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी को यह अधिकार है कि वह भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता या राज्य की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अपराधों की जांच और मुकदमे राज्यों से अपने हाथ में ले सकती है।

अलग-अलग राज्यों में बिखरे मुकदमों से हो रही देरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल कई ऐसे मामले विभिन्न राज्यों के ट्रायल कोर्ट में बिखरे पड़े हैं, जिससे सुनवाई में देरी हो रही है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एक राज्य में किया गया अपराध दूसरे राज्य को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिसडिक्शन) को लेकर जटिलताएं पैदा होती हैं। इससे आपराधिक मुकदमों में अनावश्यक देरी होती है, जिसका सीधा फायदा हार्डकोर अपराधियों को मिलता है, जो समाज और देश के हित में नहीं है।

केंद्र सरकार को कानून पर विचार का सुझाव

पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह ऐसा कानून बनाने पर विचार कर सकती है, जिससे मौजूदा कानूनी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल हो सके। सीजेआई ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज कई एफआईआर को एनआईए एक साथ अपने अधीन ले सकती है। इससे एक ही एजेंसी जांच करेगी और एक ही विशेष अदालत में मुकदमा चलेगा, जिससे विरोधाभासी फैसलों की संभावना कम होगी और सबूतों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।

एनआईए विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह पर्याप्त संख्या में एनआईए की विशेष अदालतें गठित करने पर विचार कर रहा है। यह मुद्दा एनआईए से जुड़े मामलों में जमानत और ट्रायल में हो रही देरी से जुड़ी चिंताओं के दौरान सामने आया, जहां ट्रायल कोर्ट पर अधिक बोझ होने के कारण मामलों के निपटारे में समय लग रहा है।


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