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अब iPhone तक सीमित नहीं रहेगा Apple, भारत में चिप असेंबली-पैकेजिंग की तैयारी

Published on: December 19, 2025
No longer limited to iPhone

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। Apple अब भारत में केवल iPhone असेंबल करने तक सीमित नहीं रहना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी भारतीय चिप निर्माताओं के साथ बातचीत कर रही है ताकि भारत में ही चिप्स जैसे अहम कंपोनेंट्स की असेंबली और पैकेजिंग शुरू की जा सके। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो यह भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, इससे न केवल भारत की टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, बल्कि अमेरिका को भी चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

भारत में पहली बार चिप पैकेजिंग पर गंभीर विचार

Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पहली बार चिप असेंबली और पैकेजिंग को लेकर गंभीर स्तर पर विचार किया जा रहा है। संभावनाएं हैं कि यह काम गुजरात के सानंद में बनने वाली फैक्ट्री में हो सकता है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि भारत में कौन-सी चिप्स असेंबल या पैकेज होंगी, लेकिन माना जा रहा है कि ये डिस्प्ले से जुड़ी चिप्स हो सकती हैं।

यह कदम भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति दिला सकता है।

किस कंपनी से बातचीत?

रिपोर्ट के मुताबिक, Apple ने मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी CG Semi से इस विषय पर बातचीत की है। CG Semi गुजरात के सानंद में एक OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) फैक्ट्री तैयार कर रही है। हालांकि, अभी तक इस बातचीत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Apple और CG Semi—दोनों ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। CG Semi का कहना है कि वह बाजार की अटकलों या किसी खास ग्राहक के साथ बातचीत पर प्रतिक्रिया नहीं देती और जब कोई ठोस प्रगति होगी, तभी जानकारी साझा की जाएगी।

चीन पर निर्भरता कम करना Apple की रणनीति

Apple लंबे समय से अपनी मैन्युफैक्चरिंग रणनीति में बदलाव कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक अमेरिका में बिकने वाले सभी iPhone भारत में बनाए जाएं। इसकी एक बड़ी वजह चीन पर लगाए गए भारी अमेरिकी टैरिफ हैं।

अप्रैल में अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 26% टैरिफ लगाया था, जबकि चीन से आने वाले उत्पादों पर यह 100% से ज्यादा था। बाद में ज्यादातर टैरिफ अस्थायी रूप से रोक दिए गए, लेकिन चीन पर शुल्क अब भी जारी है। ऐसे में भारत Apple के लिए एक सुरक्षित और रणनीतिक विकल्प बनता जा रहा है।

अगर Apple की यह पहल आगे बढ़ती है, तो यह न सिर्फ भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को नई रफ्तार देगी, बल्कि देश को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।


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