नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत से अमेरिका तक अवैध ‘डंकी रूट’ मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े मामले में दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और सैकड़ों लोगों को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का आरोप है।
चार्जशीट में जिन आरोपियों के नाम शामिल हैं, वे हैं –
सनी – धर्मशाला, जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
शुभम संधाल – पीरागढ़ी, दिल्ली
दोनों को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया गया था। इससे करीब तीन महीने पहले इस गिरोह के मास्टरमाइंड गगनदीप सिंह (तिलक नगर, दिल्ली) को भी पकड़ा गया था।
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मास्टरमाइंड का तरीका
NIA के अनुसार, गगनदीप सिंह हर शख्स से ₹45-50 लाख तक वसूलता था। वह पीड़ितों को वैध अमेरिकी वीज़ा दिलाने का झांसा देता था, लेकिन उन्हें स्पेन, एल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको जैसे देशों से होते हुए गैरकानूनी तरीके से अमेरिका भेजता था।
अब तक की जांच में सामने आया है कि उसने 100 से अधिक लोगों को इस खतरनाक रास्ते से भेजा था। मामला पहले पंजाब पुलिस (तरण तारन) ने दर्ज किया था, जिसे 13 मार्च 2025 को NIA ने अपने हाथों में लिया।
आरोपी सनी की भूमिका
NIA के अनुसार, सनी एक “डॉंकर” (मानव तस्करी सहयोगी) था।
2021 से 2023 तक वह मैक्सिको में रहा और वहीं से गोल्डी नामक सहयोगी और अन्य लोगों के साथ मिलकर सीमा पार कराने की व्यवस्था करता था।
पीड़ितों को कई बार अवैध रूप से हिरासत में रखकर दबाव डाला जाता था।
पैसा वसूलने के लिए उसने हवाला और बैंक ट्रांजैक्शन का सहारा लिया।
भारत लौटने के बाद भी उसने लॉजिस्टिक्स, हवाला ट्रांजैक्शन और डंकी रूट से पीड़ितों को भेजने का काम जारी रखा।
आरोपी शुभम संधाल की भूमिका
NIA ने बताया कि शुभम संधाल दिल्ली में स्थित हवाला एजेंट था।
वह गिरोह के लिए अवैध पैसों का ट्रांसफर करता था।
भारत में ग्राहकों से पैसा वसूलकर हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों में भेजता था।
उसका काम मुख्य रूप से भारत, मैक्सिको और अमेरिका के बीच पैसों की हेरफेर करना था, ताकि यह मानव तस्करी रैकेट सुचारू रूप से चलता रहे।
ED की जांच और पीड़ितों की स्थिति
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय है। पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा अमेरिका से निर्वासित किए गए अवैध प्रवासियों से जुड़े 17 मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है।
ED का कहना है कि एजेंट्स लोगों को यह कहकर बहकाते थे कि उन्हें हवाई यात्रा से सुरक्षित रूप से अमेरिका भेजा जाएगा। इसके लिए ₹45-50 लाख तक वसूले जाते थे।
लेकिन हकीकत में, पीड़ितों को खतरनाक जंगलों और अवैध बॉर्डर रूट्स से गुजारा जाता था। कई बार उन्हें और उनके परिवारों को धमकाकर अतिरिक्त पैसे भी ऐंठे जाते थे।
निष्कर्ष
NIA और ED की संयुक्त कार्रवाई ने इस अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के बड़े हिस्से को बेनकाब किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले में और भी आरोपियों की भूमिका सामने आ सकती है और आगे की जांच जारी है।
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