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बिहार में फिर लौटी एनडीए की सत्ता: ‘जंगलराज’ बनाम विकास के नैरेटिव ने बदला चुनावी माहौल

Published on: November 15, 2025
NDA returned to power in Bihar
द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। 14 नवंबर को आए परिणामों में एनडीए गठबंधन ने अप्रत्याशित रूप से बड़ी जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही एनडीए 208 सीटों के आसपास पहुँचती दिख रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य की जनता ने लगातार तीसरी बार एनडीए पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर, महागठबंधन और विशेषकर राजद के लिए यह नतीजे बड़ा झटका साबित हुए हैं। तेजस्वी यादव की पार्टी न सिर्फ अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण सीटों पर कड़ा नुकसान भी झेलना पड़ा।
इस चुनाव में भाजपा व जदयू की संयुक्त रणनीति के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आक्रामक चुनावी शैली ने निर्णायक भूमिका निभाई। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में ‘जंगलराज’ को मुख्य मुद्दा बनाते हुए महागठबंधन को कठघरे में खड़ा किया। 7 नवंबर को भभुआ की रैली में पीएम मोदी ने कहा था कि “जंगलराज वाले सत्ता में आने के लिए बेचैन हैं। इन्हें जनता की सेवा नहीं करनी, बल्कि जनता को कट्टा दिखाकर लूटना है।” उन्होंने राजद पर हमला बोलते हुए उन नारों का जिक्र किया, जिसमें हिंसा और अपराध की छवि उभरती है। पीएम मोदी ने कहा कि जनता को यह समझना होगा कि ‘कट्टा सरकार’ कभी भी बिहार के हित में नहीं हो सकती।
प्रधानमंत्री का यह हमला सिर्फ एक सभाओं तक सीमित नहीं रहा। औरंगाबाद, बेतिया, भोजपुर और नवादा की रैलियों में भी उन्होंने यह दोहराया कि महागठबंधन में शामिल राजद के शासन में अपराध का बोलबाला था। उन्होंने कहा कि जिनके समर्थक खुलेआम कट्टा, दोनोंली और फिरौती की बात करते हैं, उनसे रोजगार और निवेश की उम्मीद कैसे की जा सकती है। वोटिंग से पहले ही पीएम मोदी ने भविष्यवाणी कर दी थी कि 14 नवंबर के बाद बिहार में ‘विजय उत्सव’ होगा। आज आए नतीजों ने उस दावे को सही साबित कर दिया है।
प्रधानमंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हर सभा में कानून-व्यवस्था और विकास को अपना मुख्य मुद्दा बनाते रहे। नीतीश कुमार ने कहा कि 2005 से पहले बिहार में हालात इतने खराब थे कि ‘बिहारी’ कहलाना भी अपमान की तरह महसूस होता था। अपराध चरम पर था और निवेशक राज्य का रुख नहीं करते थे। उन्होंने दावा किया कि सत्ता संभालने के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था पहली प्राथमिकता रही, जिसके परिणामस्वरूप अपराध दर में भारी कमी आई और लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी।
सीएम नीतीश कुमार ने यह भी याद दिलाया कि पिछले दो दशकों में बिहार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, बिजली, पेयजल और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने युवाओं को अवसर देने के लिए विभिन्न रोजगार योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि “आज बिहार का युवा आत्मविश्वासी है और आगे बढ़ना चाहता है।”
इस चुनाव में एनडीए की रणनीति बहुत स्पष्ट थी—विकास बनाम जंगलराज। दूसरी ओर, महागठबंधन तेजस्वी यादव के चेहरे पर चुनाव लड़ रहा था, जिन्होंने युवाओं को नौकरियों का बड़ा वादा किया था। लेकिन एनडीए ने उनके वादों को ‘अवास्तविक’ और ‘लोकलुभावन’ बताते हुए जनता को यह समझाने की कोशिश की कि बिना स्थिर शासन और निवेश के रोजगार संभव नहीं है।
अंततः जनता का रुझान विकास के नैरेटिव की ओर झुकता दिखा। एनडीए की जीत महज राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि उस विश्वास की अभिव्यक्ति है जो बिहार की जनता ने स्थायित्व, सुरक्षा और विकास के लिए व्यक्त किया है। आज के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि ‘जंगलराज’ का डर और ‘कट्टा सरकार’ की आशंका ने वोटरों को decisively एनडीए के पक्ष में खड़ा किया।
बिहार में सत्ता की यह वापसी एनडीए के लिए बड़ी उपलब्धि है, वहीं राजद के लिए यह आत्मचिंतन का समय लेकर आई है। आने वाले दिनों में बिहार की नई सरकार विकास के उस वादे को किस तरह साकार करती है, यह देखने लायक होगा।

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