लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बरसात का मौसम अब अलविदा कह चुका है और ठंडी हवाओं की दस्तक ने मौसम में बदलाव के संकेत दे दिए हैं। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि पूर्वांचल के दक्षिण-पूर्वी जिले—बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र को छोड़कर राज्य के अधिकांश इलाकों से मानसून की विदाई हो चुकी है।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस साल मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक सक्रिय रहा। इस अवधि में पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी यूपी के कई जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई।
देवरिया जिले में औसत वर्षा 781.4 मिमी होती है, लेकिन इस बार मानसून के पूरे सीजन में सिर्फ 97.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत, पश्चिमी यूपी के संभल जिले में औसत 658.4 मिमी की तुलना में 1055.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस असमान वितरण से साफ है कि इस बार मानसून ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रुख दिखाया।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 24 और 26 सितंबर को दो चरणों में पश्चिमी यूपी से मानसून की विदाई हो चुकी थी। अब अगले 48 घंटों में दक्षिण-पूर्वी जिलों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह तक दिन का तापमान थोड़ा बढ़ने की संभावना है, जबकि रात का तापमान स्थिर रहेगा। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अक्टूबर के मध्य से उत्तर प्रदेश में ठंडी हवाओं का असर और तेज़ होगा, जिससे सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस की जा सकेगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की विदाई के बाद उत्तर भारत में धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिमी हवाएं सक्रिय होने लगेंगी। इन हवाओं के चलते रातें ठंडी और दिन सुहावने होंगे। हालांकि, पूर्वांचल के जिन जिलों में अभी मानसून की हल्की उपस्थिति बाकी है, वहां छिटपुट बारिश के आसार अगले कुछ दिनों तक बने रह सकते हैं।
फसल और किसानों पर प्रभाव:
कम बारिश के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को धान की फसल में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, जबकि पश्चिमी जिलों में अच्छी वर्षा से खरीफ फसलों को लाभ हुआ है। अब किसान रबी फसलों की तैयारी में जुट गए हैं, और मौसम में यह बदलाव गेहूं व आलू की बुवाई के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और नवंबर के पहले सप्ताह से उत्तर प्रदेश में सर्दी का असर स्पष्ट रूप से महसूस होने लगेगा।