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देवरिया के मदीना बाजार चौराहे पर ‘पैगाम-ए-अमन’ मुशायरे में गूंजा साहित्य और सौहार्द का सुर

Published on: November 6, 2025
Madina Bazar intersection of Deoria
द देवरिया न्यूज़, देवरिया जनपद के बघौचघाट थाना क्षेत्र स्थित मदीना बाजार चौराहे पर बुधवार की शाम आयोजित “पैगाम-ए-अमन” मुशायरा देर रात तक साहित्य, शायरी और सामाजिक सौहार्द का अनोखा संगम बन गया। यह आयोजन न सिर्फ कवियों और शायरों का मंच था, बल्कि अमन और एकता का ऐसा संदेश लेकर आया जिसने सभी उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया। शाम लगभग सात बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पूरे क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में लोग, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक इस मुशायरे में शामिल होने पहुंचे। मंच का शुभारंभ ‘पैगाम-ए-अमन कमेटी’ के अध्यक्ष जनार्दन शाही और संयोजक अब्दुल खालिक ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंच पर रोशनी की लहरों के साथ माहौल में जोश और उत्साह का संचार हो गया।
दीप प्रज्वलन के बाद वरिष्ठ कवि संतोष संगम ने अपने खास अंदाज में मंच का संचालन संभाला और श्रोताओं का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा, “यह मुशायरा केवल शायरी का मंच नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और समाज में मोहब्बत का पैगाम देने का माध्यम है।” उनकी इन बातों पर पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। कार्यक्रम में कई नामचीन कवि और शायरों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। मंच पर बादशाह तिवारी, अपूर्व विक्रम शाह, प्रतिभा यादव, वसीम मजहर, संतोष संगम, अवध किशोर, डॉ. शाकिर अली, अब्दुल खालिक, बृजेश त्रिपाठी और छोटेलाल कुशवाहा जैसे कवियों ने एक के बाद एक अपनी रचनाओं का पाठ किया। कभी कवियों के व्यंग्य और चुटीले अंदाज पर दर्शक ठहाके लगाते नजर आए, तो कभी उनके दर्दभरे और संवेदनशील अशआर ने लोगों की आंखों को नम कर दिया। वसीम मजहर की शेरो-शायरी ने लोगों के दिलों को छू लिया, वहीं प्रतिभा यादव की रचनाओं ने समाज में महिलाओं की भूमिका और मानवीय संवेदनाओं को बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
अपूर्व विक्रम शाह और बादशाह तिवारी के जोशीले तरन्नुम में देशभक्ति और सामाजिक समरसता का भाव झलकता रहा। वहीं डॉ. शाकिर अली और अवध किशोर की पंक्तियों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की ताकत भी रखता है।
मंच पर बार-बार तालियों की गूंज के बीच “अमन”, “मोहब्बत” और “एकता” के संदेश बार-बार दोहराए जाते रहे। कई बार कवियों ने अपने शब्दों से यह जताया कि भले ही धर्म, जाति या भाषा अलग हो, लेकिन इंसानियत सबको एक सूत्र में बांधती है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पथरदेवा विधानसभा के प्रत्याशी और समाजवादी पार्टी के नेता परवेज आलम उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, “इस तरह के आयोजन समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं। आज जब समाज में विभाजन की बातें होती हैं, ऐसे में साहित्य के माध्यम से अमन का संदेश देना अत्यंत सराहनीय पहल है।”
देर रात तक चला यह मुशायरा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता रहा। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कवियों और अतिथियों को सम्मानित किया। “पैगाम-ए-अमन” नाम के अनुरूप यह मुशायरा एक ऐसा संदेश देकर गया—कि जब शब्दों में प्यार और सम्मान की ताकत होती है, तब समाज में कोई भी दीवार बड़ी नहीं रह जाती।
यह आयोजन मदीना बाजार और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय तक याद किया जाएगा, क्योंकि इसने न सिर्फ शायरी की मिठास बिखेरी, बल्कि दिलों में अमन और एकता के दीये भी जलाए।

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