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चीन को भारत का निर्यात 90% उछला, लेकिन व्यापार घाटा अब भी चिंता का विषय: GTRI रिपोर्ट

Published on: December 20, 2025
India's exports to China jumped 90%

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। नवंबर 2025 में चीन को भारत के निर्यात में करीब 90 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह उछाल किसी व्यापक या स्थायी निर्यात वृद्धि का संकेत नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत का निर्यात कुछ चुनिंदा उत्पादों तक ही सीमित रहा है, जबकि चीन से आयात पर निर्भरता बनी रहने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा रिकॉर्ड 106 अरब डॉलर (करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की आशंका है।

रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में चीन को भारत का कुल निर्यात बढ़कर 2.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 90 प्रतिशत अधिक है। वहीं, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का निर्यात 33 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 9.2 अरब डॉलर था।

नेफ्था बना निर्यात वृद्धि का मुख्य आधार

GTRI के मुताबिक निर्यात में इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण नेफ्था रहा है, जिसका उपयोग पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक के रूप में किया जाता है। अक्टूबर 2025 में नेफ्था का निर्यात 512 प्रतिशत उछल गया, जबकि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान इसमें 172 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और इसका कुल मूल्य 1.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स में तेज लेकिन असामान्य वृद्धि

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी तेज, लेकिन बेहद सीमित और असामान्य वृद्धि देखने को मिली। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) का निर्यात अक्टूबर में साल-दर-साल आधार पर 8,577 प्रतिशत बढ़कर 296.5 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं, अप्रैल-अक्टूबर अवधि में इसमें 2,000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई और निर्यात मूल्य 418 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

इसके अलावा, मोबाइल फोन कंपोनेंट्स का निर्यात भी 82 प्रतिशत बढ़कर 362 मिलियन डॉलर हो गया। रिपोर्ट के अनुसार यह ट्रेंड असामान्य है, क्योंकि भारत आमतौर पर इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा चीन से आयात करता है।

पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों में गिरावट

इसके उलट भारत के पारंपरिक निर्यात उत्पादों में गिरावट या सीमित वृद्धि देखने को मिली। लौह अयस्क का निर्यात अक्टूबर में 1.2 प्रतिशत घटा, जबकि अप्रैल-अक्टूबर अवधि में इसमें 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, झींगा (श्रिंप) निर्यात में मामूली बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन इसमें भी स्थिरता नहीं दिखी।

निर्यात में स्थिरता का अभाव

GTRI रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को भारत के शीर्ष तीन निर्यात—नेफ्था, लौह अयस्क और झींगा—में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। नेफ्था का निर्यात 2022 में 1.83 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 1.91 अरब डॉलर हुआ, लेकिन 2024 में गिरकर 1.26 अरब डॉलर पर आ गया और 2025 में लगभग स्थिर रहा। इसी तरह लौह अयस्क और झींगा निर्यात में भी लगातार अस्थिरता बनी रही है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि चीन को भारत के निर्यात में हालिया उछाल व्यापक आधार पर नहीं है। यह वृद्धि मुख्य रूप से नेफ्था और कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों तक सीमित है, जबकि भारत की पारंपरिक निर्यात टोकरी में कोई मजबूत और स्थायी विस्तार नहीं दिखता। ऐसे में चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बना हुआ है।


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