द देवरिया न्यूज़ : दुनिया में अक्सर यह थ्योरी तैरती रहती है कि एक दिन ऐसी तकनीक विकसित होगी जो इंसान को अमर बना देगी—यानी मृत्यु को हमेशा के लिए रोक देगी। यह विचार भले ही साइंस फिक्शन जैसा लगता हो, लेकिन दुनिया के कई वैज्ञानिक इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं। अब इसी कड़ी में प्रसिद्ध कंप्यूटर वैज्ञानिक और गूगल के पूर्व इंजीनियर रे कुरजवील ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि 2030 तक ऐसी तकनीक उपलब्ध हो सकती है जो इंसानों को मरने नहीं देगी। यानी सिर्फ चार साल बाद मानव जीवन को हमेशा के लिए बढ़ाने वाली खोजें सामने आ सकती हैं।
तो सवाल यह है कि ऐसा संभव कैसे होगा? इसके जवाब में कुरजवील साफ कहते हैं—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनोटेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी मिलकर मानव जीवन की सीमाओं को खत्म कर देंगी।
कौन हैं रे कुरजवील?
टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक रे कुरजवील दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कंप्यूटर वैज्ञानिकों में शामिल हैं। वे गूगल में इंजीनियर रह चुके हैं और टेक्नोलॉजी के भविष्य पर कई क्रांतिकारी किताबें लिख चुके हैं। उनकी विश्वसनीयता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 1999 में अमेरिका का नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी दिया गया, वहीं 2002 में उन्हें नेशनल इन्वेंटर्स हॉल ऑफ फेम में जगह मिली।
कुरजवील का कहना है कि टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मनुष्य को अमर बनाना अब दूर का सपना नहीं रहा।
AI खोलेगा अमरता का रास्ता
कुरजवील ने अपनी प्रसिद्ध किताब “द सिंगुलैरिटी इज़ नियर” में भविष्यवाणी की थी कि 2029 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान जितनी बुद्धिमान हो जाएगी। यह ट्यूरिंग टेस्ट को पास कर लेगी—वही टेस्ट जो जांचता है कि कंप्यूटर इंसान जैसा सोच और बात कर सकता है या नहीं।
उनका कहना है कि एक बार जब AI मानव बुद्धि को पकड़ लेगी, तब तकनीकी प्रगति इतनी गति पकड़ लेगी कि बीमारियों का इलाज, शरीर की मरम्मत और उम्र को रोकना संभव हो जाएगा। 2030 तक इंसान अपनी उम्र को नियंत्रित करने की स्थिति में हो सकता है।
2045: जब मशीनें और इंसान एक हो जाएंगे
कुरजवील की सबसे चर्चित भविष्यवाणी ‘सिंगुलैरिटी’ को लेकर है। उनका कहना है कि 2045 तक AI और मानव मस्तिष्क एक हो जाएंगे।
इससे:
मनुष्य की क्षमता अरबों गुना बढ़ जाएगी
इंसान और मशीनें मिलकर सुपर-इंटेलिजेंट प्राणी बन जाएंगे
उम्र बढ़ने और मृत्यु को पूरी तरह रोका जा सकेगा
कुरजवील का दावा है कि इंसान अपना दिमाग डिजिटल रूप में कंप्यूटर में भी ट्रांसफर कर सकेगा—यानी चेतना का डिजिटल वर्ज़न तैयार होगा।
नैनोबॉट्स: अमरता की असली चाबी
कुरजवील की सबसे दिलचस्प थ्योरी है नैनोबॉट्स—एक ऐसे सूक्ष्म रोबोट जिन्हें मानव आंख देख भी नहीं सकती।
ये नैनोबॉट्स:
शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करेंगे
बीमारियों को खत्म करेंगे
शरीर को जवान बनाए रखेंगे
डाइजेशन और ब्लड सिस्टम में जाकर पोषण को नियंत्रित करेंगे
शरीर के कचरे को बाहर निकालेंगे
वायरलेस नेटवर्क से शरीर को बताएंगे कि उसे क्या चाहिए
उनके अनुसार, नैनोबॉट्स की मदद से शरीर कभी बूढ़ा ही नहीं होगा।
कुरजवील की 86% भविष्यवाणियां पहले सच हो चुकी हैं
2010 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 1990 के दशक में की गई उनकी 86% भविष्यवाणियां सच साबित हुईं, जैसे—
लैपटॉप और टैबलेट का आम होना
कास्परोव का AI कंप्यूटर से हारना
हाई-स्पीड इंटरनेट का दुनिया भर में फैलना
घर से कम्प्यूटर पर डिजाइन बनने लगना
पॉकेट-साइज़ कंप्यूटर का हर हाथ में पहुँचना
इसी वजह से पीटर थिएल और जेफ बेजोस जैसे अरबपति उनकी थ्योरी पर भरोसा करते हुए अरबों डॉलर निवेश कर चुके हैं।
क्या सच में इंसान अमर होगा?
वैज्ञानिक समुदाय में कुरजवील की भविष्यवाणियां बहस का विषय बनी रहती हैं। कुछ विशेषज्ञ उनका समर्थन करते हैं, तो कुछ इसे अभी भी सिर्फ कल्पना कहते हैं। लेकिन एक बात तय है—AI, बायोटेक और नैनोटेक की रफ्तार को देखते हुए आने वाला समय मानव इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
अगर कुरजवील की भविष्यवाणी सही निकली, तो आने वाले दशकों में मृत्यु एक विकल्प बन जाएगी, मजबूरी नहीं।
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