द देवरिया न्यूज़,सना (यमन): यमन की राजधानी सना में शुक्रवार को हूती (Houthi) समर्थकों ने हथियार लहराते हुए सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान ईरान और लेबनान के समर्थन में नारेबाजी भी की गई। इसी रात हूती समूह ने दावा किया कि उन्होंने इजरायल के कुछ शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इस घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नए मोर्चे की आशंका बढ़ा दी है।
हूती कौन हैं?
हूती, जिन्हें ‘अंसार अल्लाह’ भी कहा जाता है, यमन का एक सशस्त्र और राजनीतिक संगठन है। यह मुख्य रूप से जैदी शिया मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है और 1990 के दशक में उभरा था। शुरुआत में यह एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन था, लेकिन समय के साथ यह एक मजबूत सैन्य ताकत बन गया। 2014-15 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और तब से वे यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। माना जाता है कि हूती को ईरान से राजनीतिक, तकनीकी और सीमित सैन्य समर्थन मिलता है, हालांकि वे पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में नहीं हैं।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में क्यों अहम हैं हूती?
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है और स्वेज नहर तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। दुनिया के लगभग 10-15% समुद्री व्यापार और बड़ी मात्रा में तेल-गैस इसी मार्ग से गुजरते हैं। हूती का नियंत्रण यमन के पश्चिमी तट के बड़े हिस्से पर है, जो इस जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। ऐसे में वे जहाजों को निशाना बनाकर या मार्ग को असुरक्षित बनाकर वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इस मार्ग को पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है, क्योंकि यहां अंतरराष्ट्रीय नौसेनाएं तैनात हैं, लेकिन व्यवधान पैदा करना संभव है।
‘Axis of Resistance’ क्या है?
‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ यानी प्रतिरोध धुरी—ईरान और उसके सहयोगी संगठनों का एक अनौपचारिक नेटवर्क माना जाता है। इसमें लेबनान का हिज्बुल्लाह, कुछ फलस्तीनी गुट और इराक-सीरिया के मिलिशिया शामिल हैं। इनका साझा रुख अमेरिका और इजरायल के प्रभाव का विरोध करना है। हूती को भी इसी धुरी का हिस्सा माना जाता है।
क्या पहले भी हमलों में शामिल रहे हैं?
हूती पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों में सक्रिय रहे हैं। वे सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर चुके हैं और लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने के आरोप भी लगते रहे हैं। हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि यदि हालात बने तो वे सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं।
कितना बड़ा हो सकता है असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूती बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बाधित करते हैं और साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य भी प्रभावित रहता है, तो दुनिया के दो बड़े समुद्री ‘चोक पॉइंट’ एक साथ संकट में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में तेल की कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
भारत, यूरोप और एशिया के लिए यह मार्ग ऊर्जा आपूर्ति का अहम जरिया है। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ेंगे।
दोहा इंस्टीट्यूट फॉर ग्रेजुएट स्टडीज के प्रोफेसर मोहम्मद अल्मासरी के अनुसार,
“अगर बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग एक साथ प्रभावित होते हैं, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।”
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