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अलीगढ़ में शिक्षकों को ‘डॉग ट्रैकर’ बनाने का आरोप, बीएसए ने किया खंडन

Published on: December 20, 2025
'Dog tracker' to teachers in Aligarh
द देवरिया न्यूज़,अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के एक कथित निर्देश को लेकर शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। आरोप है कि जिले के सभी सरकारी शिक्षकों को स्कूलों से बाहर निकलकर आवारा कुत्तों की गिनती करने का आदेश दिया गया है। इस निर्देश के सामने आने के बाद शिक्षकों में नाराजगी देखी जा रही है और इसे शिक्षण कार्य से भटकाने वाला कदम बताया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के यह जिम्मेदारी दी जा रही है। उनका आरोप है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अब उन्हें सड़कों पर आवारा कुत्तों की पहचान और गिनती करने के लिए कहा जा रहा है। शिक्षकों ने यह भी कहा कि पहले से ही वे बीएलओ के रूप में एसआईआर (Special Intensive Revision) जैसे कार्यों में लगे हुए हैं और अब यह नया दायित्व उनके ऊपर अतिरिक्त बोझ बनकर आ गया है।
शिक्षकों का तर्क है कि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपे जाने से बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। एक शिक्षक ने कहा, “हमारा मूल कार्य बच्चों को शिक्षा देना है, लेकिन प्रशासन हमें बार-बार ऐसे कामों में लगा देता है, जिनका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। पहले मतदान से जुड़े कार्य, फिर एसआईआर और अब आवारा कुत्तों की गिनती—यह सिलसिला कहां जाकर रुकेगा?”
हालांकि, इस पूरे मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़, राकेश कुमार ने आवारा कुत्तों की गिनती के निर्देश से साफ इनकार किया है। बीएसए ने कहा कि शिक्षकों को कुत्तों की गणना करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भ्रम माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों को गलत तरीके से समझने के कारण पैदा हुआ है।
बीएसए राकेश कुमार के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में केवल स्कूल परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में बच्चों को आवारा कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए बाउंड्रीवॉल निर्माण, सतर्कता और आवश्यक सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है। शिक्षकों को केवल सतर्क रहने और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े एहतियाती कदम उठाने के लिए कहा गया है।
बीएसए ने दो टूक कहा, “शिक्षकों का आवारा कुत्तों की गिनती या किसी तरह की गणना से कोई लेना-देना नहीं है। न तो ऐसा कोई आदेश जारी किया गया है और न ही भविष्य में ऐसी कोई योजना है।”
फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट और लिखित रूप से स्थिति साफ करनी चाहिए, ताकि अनावश्यक भ्रम न फैले और शिक्षकों का ध्यान अपने मूल दायित्व—शिक्षा—से न हटे।

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