द देवरिया न्यूज़,देवरिया। बदलते मौसम के साथ बच्चों में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में पिछले दो दिनों से पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) लगातार फुल चल रहा है। बृहस्पतिवार को कुल 52 बच्चे भर्ती रहे, जिनमें से अधिकांश ठंड के कारण पैदा हुई सांस की समस्या से पीड़ित थे।
रोजाना 200 से ज्यादा बच्चे आ रहे OPD में
मेडिकल कॉलेज की बाल रोग ओपीडी में प्रतिदिन 200 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से बड़ी संख्या उन बच्चों की है जो मौसम में अचानक आई ठंड की वजह से बुखार, कफ, सांस लेने में तकलीफ जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। गंभीर लक्षण दिखने पर बच्चों को तुरंत पीआईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है।
पीआईसीयू लगातार दो दिन फुल, 60% बच्चे सांस संबंधी बीमारी के शिकार
डॉक्टरों के अनुसार, पिछले दो दिनों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही:
बुधवार:
पीआईसीयू में 21 बच्चे भर्ती
चिल्ड्रेन वार्ड में 27 बच्चे
बृहस्पतिवार:
कुल भर्ती बच्चे – 52
पीआईसीयू में 17 बच्चे (15 बेड पर 17 बच्चे)
चिल्ड्रेन वार्ड में 35 बच्चे
डॉक्टरों ने बताया कि भर्ती बच्चों में करीब 60% ठंड से उत्पन्न श्वसन संबंधी रोगों से पीड़ित हैं।
अलग-अलग इलाकों से बीमार बच्चों को किया गया भर्ती
बृहस्पतिवार को जिन बच्चों को भर्ती कराया गया, उनमें शामिल हैं—
शिवम, भलुअनी – सांस लेने में गंभीर दिक्कत
आयुष्मान यादव (7 वर्ष), परसिया मल्ल – ठंड लगने से बुखार व उल्टी
अभिनव (18 माह), नेतवार – बुखार के बाद झटका आने पर भर्ती
आयुष (5 वर्ष), रामपुर कारखाना – कफ व सांस की समस्या
रुद्रांश (10 माह) – कफ व सांस में दिक्कत
समर (2 वर्ष), सुरौली – सांस लेने में परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि समय से उपचार शुरू करने के कारण बच्चों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
CMएस डॉक्टर एच.के. मिश्र ने दी सावधानी बरतने की सलाह
सीएमएस डॉ. एच.के. मिश्र ने बताया कि मौसम में तेजी से आ रहा बदलाव बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों को गंभीर बीमारी की ओर धकेल सकती है।
उन्होंने अभिभावकों को निम्न सावधानियां बरतने की सलाह दी—
बच्चों को पूरी बांह के गर्म कपड़े पहनाएं
सुबह और शाम ठंडी हवा में बाहर न निकलने दें
छोटे बच्चों को फर्श पर न खेलने दें, क्योंकि ठंड सीधे शरीर में प्रवेश करती है
लक्षण दिखते ही पास के सरकारी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराएं
गंभीर लक्षण होने पर तुरंत मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में दिखाएं
डॉ. मिश्र ने कहा कि समय पर सावधानी और इलाज से अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
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