हालांकि, इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों के सामने नक्सलियों के शीर्ष कैडर के बचे दो प्रमुख नाम—गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव और मिशिर बेसरा—को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, 80 वर्षीय गणपति अब सक्रिय नहीं माना जा रहा है। एजेंसियों के पास उसकी वर्तमान लोकेशन या गतिविधियों को लेकर कोई ठोस इनपुट नहीं है, जिससे यह आकलन किया जा रहा है कि उससे अब कोई बड़ा खतरा नहीं है।
वहीं, मिशिर बेसरा को फिलहाल सक्रिय शीर्ष नक्सली कमांडर के रूप में देखा जा रहा है। खुफिया जानकारी के अनुसार, वह करीब 50 से अधिक साथियों के साथ झारखंड के घने सारंडा जंगलों में छिपा हुआ है। झारखंड पुलिस की विशेष जगुआर यूनिट द्वारा इलाके में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिशिर बेसरा पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित है और उसे आत्मसमर्पण के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कोशिश है कि वह 31 मार्च से पहले सरेंडर कर दे, हालांकि अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ मुठभेड़ की कार्रवाई भी संभव है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “टॉप कैडर में अब केवल मिशिर ही ऐसा कमांडर बचा है जो सक्रिय है। बाकी या तो निष्क्रिय हो चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं।” अधिकारियों का मानना है कि यदि मिशिर बेसरा आत्मसमर्पण कर देता है, गिरफ्तार हो जाता है या मुठभेड़ में मारा जाता है, तो देश को लगभग नक्सल मुक्त घोषित किया जा सकता है।
इस बीच छत्तीसगढ़ में भी नक्सल विरोधी अभियान तेज हो गए हैं। सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने हाल ही में मूचाकी कैलाश नाम के एक नक्सली को मुठभेड़ में मार गिराया। इसके अलावा कर्रेगुट्टा हिल्स क्षेत्र को नक्सल मुक्त करने के लिए ‘केजीएच-2 ऑपरेशन’ पहले से जारी है।
कुल मिलाकर, देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है, जहां आने वाले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं।