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कर्नाटक कांग्रेस में सीएम पद पर घमासान: डीके शिवकुमार बोले– फैसला हाईकमान करेगा, दिल्ली बुलावे का इंतजार

Published on: December 21, 2025
CM post in Karnataka Congress

द देवरिया न्यूज़,बेंगलुरु/नई दिल्ली : कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले कई महीनों से जारी खींचतान के बीच उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार का बड़ा बयान सामने आया है। शनिवार को उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान ही करेगा। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में वह और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दोनों ही पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं और जो भी निर्णय होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।

पत्रकारों से बातचीत में डीके शिवकुमार ने कहा, “हाईकमान ने हमें बताया है कि सही समय पर दिल्ली बुलाया जाएगा। जब बुलावा आएगा, तब हम दोनों साथ में दिल्ली जाएंगे। मैं आप लोगों को बताए बिना कुछ नहीं करूंगा और न ही चुपचाप कहीं जाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि हाईकमान लगातार संपर्क में है और उचित समय पर बैठक होगी।

सिद्धारमैया के बयान के बाद प्रतिक्रिया

डीके शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में दावा किया था कि वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। सिद्धारमैया ने यह भी कहा था कि कांग्रेस हाईकमान उनके पक्ष में है और 2023 में ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान की मौजूदगी में आपसी सहमति से एक समझौता किया था और दोनों नेता उसी समझौते के अनुसार आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी हित सर्वोपरि है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर संगठन का फैसला होगा।

‘पावर शेयरिंग’ फॉर्मूले से बढ़ी अटकलें

दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा होने के बाद, यानी 20 नवंबर के आसपास मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी वजह 2023 में सामने आया कथित ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूला’ है, जिसके तहत सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद साझा करने की चर्चा थी।

इसी बीच डीके शिवकुमार के घर कुछ नागा साधुओं के पहुंचने और उन्हें आशीर्वाद देने की घटनाओं ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और हवा दे दी थी। हालांकि, शिवकुमार ने इन घटनाओं को निजी बताते हुए राजनीतिक अर्थ निकालने से इनकार किया है।

दिल्ली दौरे पर दी सफाई

डीके शिवकुमार ने अपने आगामी दिल्ली दौरे को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि वह मंगलवार को दिल्ली जाएंगे, लेकिन यह यात्रा नेतृत्व विवाद से जुड़ी नहीं है। शिवकुमार के अनुसार, केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने उन्हें नदी जोड़ो परियोजना को लेकर बुलाया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में वह महादयी, कृष्णा जल विवाद, मेकेदाटु और अपर भद्रा परियोजना जैसे कर्नाटक से जुड़े अहम जल मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह केंद्रीय जल संसाधन मंत्री, वन मंत्री और शहरी विकास मंत्री से भी मुलाकात करेंगे। जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

केंद्र सरकार पर मनरेगा को लेकर हमला

इस दौरान डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम बदलने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महात्मा गांधी के नाम को हटाकर राष्ट्रपिता का अपमान कर रही है।

शिवकुमार ने कहा, “देश को गांधी चाहिए। अगर सरकार में हिम्मत है तो नोटों से भी गांधी जी की तस्वीर हटा दे।” उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में शुरू हुई थी। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इस योजना को कमजोर करना चाहती है, इसलिए इसका नाम बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा किया गया तो कर्नाटक से इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

कुल मिलाकर, डीके शिवकुमार के बयान से यह साफ है कि कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर फैसला अभी टला हुआ है और सबकी नजरें अब कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


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