द देवरिया न्यूज़,ढाका : बांग्लादेश एयरफोर्स 12 से 16 यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान खरीदने की संभावनाएं टटोल रही है। बांग्लादेश पहले चीनी J-10C फाइटर जेट को लेकर बातचीत कर रहा था, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि राफेल को लेकर चीन के दावे भ्रामक थे और J-10C उसकी जरूरतों पर खरा नहीं उतरता। सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक बांग्लादेश ने यह भी समझा कि भारतीय वायुसेना के राफेल के सामने चीनी J-10C टिक नहीं सकता, जिसके बाद उसने राफेल की श्रेणी के माने जाने वाले यूरोफाइटर टाइफून पर ध्यान केंद्रित किया है।
अगर यह सौदा फाइनल होता है, तो बांग्लादेश यूरोफाइटर टाइफून ऑपरेट करने वाला दुनिया का 11वां देश बन जाएगा। खास बात यह होगी कि वह दक्षिण एशिया का पहला और यूरोप व मिडिल ईस्ट के बाहर पहला ऐसा देश होगा, जो इस 4.5-जेनरेशन फाइटर जेट को अपने बेड़े में शामिल करेगा। यूरोफाइटर टाइफून को ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन मिलकर विकसित करते हैं।
इस संभावित डील को चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मई में हुए संघर्ष के बाद चीन ने राफेल के खिलाफ और J-10C के पक्ष में जमकर प्रचार किया था, लेकिन अब तक उसे इस जेट के लिए कोई बड़ा नया ग्राहक नहीं मिल पाया है।
अग्नि-5 के सामने फाइटर जेट बेअसर
दक्षिण एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत की अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को लेकर भी अहम चर्चा हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-5 जैसी एक ही लंबी दूरी की मिसाइल किसी भी पारंपरिक लड़ाकू विमान बेड़े की प्रभावशीलता को खत्म करने के लिए पर्याप्त है। भले ही भविष्य में बांग्लादेश 16 यूरोफाइटर टाइफून जैसे आधुनिक जेट हासिल कर ले, वे अग्नि-5 जैसी रणनीतिक प्रणाली के सामने दबाव बनाने की स्थिति में नहीं होंगे।
अग्नि-5 की 5,000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता पूरे क्षेत्र में सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटर्स को कवर करती है। हालांकि यूरोफाइटर और अग्नि-5 की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। यूरोफाइटर एक टैक्टिकल एयर कॉम्बैट प्लेटफॉर्म है, जबकि अग्नि-5 एक रणनीतिक, परमाणु-सक्षम हथियार है, जिसका उद्देश्य युद्ध को रोकना है।
क्यों अग्नि-5 को चुनौती नहीं दे सकता यूरोफाइटर
डिफेंस एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोई भी फाइटर जेट अग्नि-5 जैसी बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने में सक्षम नहीं है। री-एंट्री के दौरान बैलिस्टिक मिसाइलें मैक 20 से मैक 25 की हाइपरसोनिक गति से चलती हैं, जिस पर प्रतिक्रिया देना किसी भी आधुनिक फाइटर के लिए लगभग असंभव होता है। इसके अलावा अग्नि-5 के मोबाइल लॉन्चर इसे और ज्यादा घातक बनाते हैं, क्योंकि उन्हें पहले से पहचानना और निशाना बनाना बेहद मुश्किल होता है।
यही कारण है कि संख्या के लिहाज से आधुनिक फाइटर जेट हासिल करने के बावजूद बांग्लादेश भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की स्थिति में नहीं आ सकता।
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