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ईरान के करीब अमेरिका की ताकत बढ़ी: USS जॉर्ज बुश की तैनाती से बढ़ा युद्ध का खतरा

Published on: March 30, 2026
America's close to Iran
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए एक और विमानवाहक पोत USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश को तैनात कर दिया है। इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी शामिल हैं, जिनका संचालन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) करेगा।

यह तैनाती ऐसे समय में की गई है जब अमेरिका पहले ही ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को 2003 के इराक युद्ध के बाद के सबसे बड़े स्तर तक बढ़ा चुका है। इस कदम से ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंकाएं और तेज हो गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश को उस समय क्षेत्र में भेजा गया है जब अमेरिका का एक अन्य अत्याधुनिक विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर. फोर्ड आग लगने की घटना के बाद मरम्मत के लिए अपने बेस लौट गया है। इससे अस्थायी रूप से अमेरिकी नौसैनिक क्षमता प्रभावित हुई थी, जिसे अब इस नई तैनाती से संतुलित किया जा रहा है।

फिलहाल मध्य पूर्व में अमेरिका के 40,000 से 50,000 सैनिक विभिन्न ठिकानों पर तैनात हैं। इसके अलावा USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही अरब सागर में मौजूद है। पेंटागन ने हाल ही में उत्तरी कैरोलिना से 2,000 से 3,000 पैराट्रूपर्स को भी क्षेत्र में भेजने का आदेश दिया है। वहीं 27-28 मार्च 2026 के बीच USS त्रिपोली के जरिए करीब 3,500 मरीन और नौसैनिकों की तैनाती की गई है।

USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिकी नौसेना का एक प्रमुख विमानवाहक पोत है। यह निमित्ज-क्लास का 10वां और अंतिम कैरियर है, जो 2009 से सेवा में है। करीब 1,092 फीट लंबा और 100,000 टन से अधिक वजनी यह पोत एक साथ 5,000 से ज्यादा कर्मियों और 70 से अधिक विमानों को संचालित करने की क्षमता रखता है।

यह पोत दो परमाणु रिएक्टरों से संचालित होता है और 30 नॉट (करीब 56 किमी/घंटा) की अधिकतम गति से चल सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह 20 वर्षों से अधिक समय तक बिना ईंधन भरे संचालन में रह सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ताकत में इस तरह का इजाफा क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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