एअर इंडिया अपने क्रू और ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग प्रणाली को और सुदृढ़ कर रही है। इसके लिए ट्रेनिंग अकादमी को नए सिरे से विकसित किया गया है, जहां रोज बड़ी संख्या में एविएशन प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। कंपनी का उद्देश्य कर्मचारियों की दक्षता और प्रोफेशनलिज्म बढ़ाकर यात्रियों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर सेवा उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही एअर इंडिया अपने पुराने बोइंग 787-8 विमानों के रिफिटिंग प्रोग्राम को तेज कर रही है। इन विमानों में नई आरामदायक सीटें, आधुनिक केबिन इंटीरियर, वाई-फाई सुविधा और बेहतर इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम लगाए जा रहे हैं। फिलहाल हर महीने दो से तीन विमानों को अपग्रेड किया जा रहा है और अनुमान है कि 2026 के अंत तक अधिकांश वाइड-बॉडी विमान नए स्वरूप में उड़ान भरने लगेंगे।
वर्ष 2026 में एअर इंडिया के बेड़े में छह नए वाइड-बॉडी और लगभग 20 नए नैरो-बॉडी विमान भी शामिल होंगे। इसके अलावा 2027–28 के दौरान बड़े ऑर्डर की डिलीवरी शुरू होने से उड़ान क्षमता और नए रूट्स के विस्तार में और तेजी आने की उम्मीद है।
अपग्रेडेड विमानों में यात्रियों को ज्यादा आरामदायक सीटें, बड़े एंटरटेनमेंट स्क्रीन, वाई-फाई कनेक्टिविटी और बेहतर लाइटिंग का अनुभव मिलेगा। साथ ही फूड और बेवरेज सर्विस को भी नया रूप दिया जा रहा है, जिसमें मेन्यू और वाइन सर्विस में सुधार शामिल है। एअर इंडिया प्रीमियम इकोनॉमी क्लास को भी ज्यादा रूट्स पर शुरू करने की तैयारी में है।
यात्रियों की सुविधा के लिए एयरलाइन अपने लाउंज नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है। बढ़ते बेड़े को संभालने के लिए टैलेंट डेवलपमेंट और मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाया जा रहा है। अमरावती में नया फ्लाइंग स्कूल हर साल करीब 180 पायलट तैयार करेगा, जबकि बेंगलुरु में बड़ा एमआरओ सेंटर 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी का लक्ष्य है कि 2026 तक अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर लगभग 80 प्रतिशत और घरेलू रूट्स पर अधिकांश उड़ानों में यात्रियों को नया और उन्नत एअर इंडिया अनुभव मिल सके।