द देवरिया न्यूज़ ,नई दिल्ली। दिवाली की रौनक अब धीरे-धीरे जहरीली हवा में बदल चुकी है। त्योहार की चमक के बाद अब राजधानी की फिजा में पटाखों का धुआं, धूल और धुंध इस कदर घुल चुका है कि सांस लेना भी चुनौती बन गया है। दिल्ली-एनसीआर की हवा फिर से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है, और विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
त्योहार की रात जगमगाती रोशनी अब सुबह की धुंध और धुएं में तब्दील हो चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार शाम 4 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 305 दर्ज किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। तेज हवाओं ने अस्थायी राहत जरूर दी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अल्पकालिक है और हवा फिर जहरीली होती जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर का हाल
दिल्ली के साथ ही आसपास के शहरों की हवा भी खराब हो चुकी है। ग्रेटर नोएडा का AQI 280, नोएडा का 276, गाजियाबाद का 252, और गुरुग्राम का 208 दर्ज किया गया। इन सभी शहरों की हवा ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। फरीदाबाद की हवा फिलहाल कुछ बेहतर है, जहां AQI 198 रहा, जो “मध्यम” श्रेणी में गिना जाता है।
सीपीसीबी के अनुसार, गुरुवार को उत्तर-पश्चिम दिशा से 10–15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली, जिससे प्रदूषक तत्वों का आंशिक रूप से विसर्जन हुआ। हालांकि, मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि सोमवार तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में ही बनी रहेगी।
हवा में घुला ज़हर
दिल्ली की हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा स्वास्थ्य मानकों से कई गुना अधिक हो चुकी है।
PM10 स्तर: 249
PM2.5 स्तर: 150.9
ये आंकड़े सामान्य स्तर से लगभग तीन गुना ज्यादा हैं। धुएं और धुंध की मोटी परत के कारण पालम इलाके में दृश्यता घटकर 800 मीटर तक रह गई। इससे सुबह के समय यातायात पर भी असर पड़ा।
पिछले 9 दिनों में तीन गुना बिगड़ी हवा
अच्छे मानसून के कारण सितंबर तक दिल्ली की हवा अपेक्षाकृत साफ थी। लेकिन दिवाली के बाद हालात तेजी से बदले। 13 अक्तूबर को जहां AQI 189 था, वहीं अब यह 300 के पार पहुंच गया है। दिवाली की आतिशबाजी ने प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पटाखों के धुएं और बारूद के कण अब भी वायुमंडल में तैर रहे हैं। हवा की कम रफ्तार के कारण ये प्रदूषक जमीन के पास जमा होकर जहरीली परत बना रहे हैं।
सरकार ने कसी कमर
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए करीब 2000 टीमें तैनात की हैं।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन टीमों के पास:
376 एंटी-स्मॉग गन
266 वाटर स्प्रिंकलर
91 मैकेनाइज्ड स्वीपर मशीनें हैं, जो GPS मॉनिटरिंग सिस्टम से निगरानी में हैं।
सिरसा ने बताया कि:
443 टीमें कूड़ा जलाने पर,
578 टीमें वाहनों से निकलने वाले धुएं पर,
378 टीमें धूल नियंत्रण पर निगरानी कर रही हैं।
इसके अलावा 505 मोबाइल प्रॉसिक्यूशन टीमें लगातार सड़कों पर गश्त कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने आईआईटी कानपुर और मौसम विभाग के सहयोग से जल्द ही क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) की योजना शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्वों को नीचे गिराया जा सके।
पराली जलाने का असर
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, राजधानी के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी गुरुवार को 1.52% रही। अब तक 12,113 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 50% कम है, लेकिन हवा की दिशा और गति बदलने पर इसका प्रभाव तुरंत दिल्ली की हवा में दिख सकता है।
आईसीएआर की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर से 21 अक्तूबर के बीच पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में कुल 1,729 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। यह संख्या पिछले साल के 3,651 मामलों की तुलना में काफी कम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां प्रदूषक अधिक समय तक फंसे रहते हैं।
अस्पतालों में बढ़े मरीज
प्रदूषण बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में सांस और एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
डॉ. रमेश मीणा, आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ने कहा —
“वर्तमान हवा बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। इससे खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।”
डॉक्टरों ने लोगों को सुबह-सवेरे या देर रात सैर से बचने, एन95 मास्क पहनने, और इनडोर पौधों जैसे एलोवेरा, स्नेक प्लांट आदि लगाने की सलाह दी है।
आने वाले दिन और मुश्किल
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में हवा की गति कम रहेगी, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। यदि हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम बनी रही तो पंजाब और हरियाणा की ओर से उठने वाला धुआं भी दिल्ली-एनसीआर में पहुंचेगा।
त्योहार की जगमगाहट भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन अब राजधानी को जहरीली धुंध की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है — एक ऐसी धुंध, जिसने दिवाली की खुशियों को बारूद और धुएं के बादल में बदल दिया है।
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