बरहज बना ‘छोटी काशी’, उमड़ा जनसैलाब
देवरिया का धार्मिक नगर बरहज एक बार फिर ‘छोटी काशी’ के रूप में जगमगा उठा। शहर की गलियों से लेकर नदी तट तक श्रद्धालुओं की भीड़ निरंतर बढ़ती रही। महिलाएं नई साड़ियां पहनकर कलश और थाल लिए पहुंचीं, तो पुरुष श्रद्धालु दीपदान और पूजन में तल्लीन दिखे।
रामजानकी मंदिर, हनुमान मंदिर और महादेव धाम जैसे मंदिरों में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई श्रद्धालु रविवार की रात से ही घाटों पर डेरा डालकर सूर्योदय के साथ पहला स्नान करने के लिए प्रतीक्षा में बैठे रहे। भक्तिमय वातावरण में भजन, कीर्तन और आरती की गूंज से सरयू तट आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
पूजन, कथा और दान का रहा विशेष महत्व
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने नदी तट पर तट पूजन किया और ब्राह्मणों से भगवद कथा और व्रत कथा सुनी। लोगों ने तिल, गुड़, चावल, फल और वस्त्रों का दान कर पुण्य अर्जित किया। कई भक्तों ने यह संकल्प लिया कि वे अगले वर्ष फिर इसी पवित्र अवसर पर मां सरयू में स्नान करेंगे।
बरहज के साथ-साथ भागलपुर, कुशहरी, प्यासी और रतनपुरा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। नदी किनारे बच्चों के खिलौनों, प्रसाद, दीपक, श्रृंगार सामग्री और मिठाइयों की दुकानें सजी थीं। महिलाओं ने स्नान के बाद दीपदान कर नदी तट को हजारों दीपों से आलोकित कर दिया।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रही सख्त
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, होमगार्ड, महिला कांस्टेबल और जल पुलिस की गश्ती टीमें तैनात रहीं।
बरहज और भागलपुर घाटों पर भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष पैदल मार्ग बनाए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नगर पंचायत बरहज की ओर से पीने के पानी, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई थी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घाटों पर अस्थायी चिकित्सा शिविर और प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए गए, जहां जरूरतमंदों को तत्काल चिकित्सीय सहायता दी गई।
यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन रहा अलर्ट
रोडवेज विभाग ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त बस सेवाएं शुरू कीं। बरहज, भागलपुर, बड़हलगंज और अन्य घाटों के लिए देर रात से ही बसें चलनी शुरू हो गईं। रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी और आरपीएफ जवानों को तैनात किया गया ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
आस्था और उल्लास का संगम
पूरा दिन सरयू तट पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक गीत — “सरयू मईया मोरे पाप हर लइह” — गाती रहीं, जबकि पुरुष श्रद्धालु आरती और भजन मंडलियों में लीन रहे। शाम को दीपदान का मनोहारी दृश्य देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। हजारों दीपों से सरयू नदी का जल आलोकित हो उठा — मानो धरती पर देव दीपावली उतर आई हो।
श्रद्धालुओं ने मांगी सुख-समृद्धि की कामना
स्नान और पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने अपने परिवार, समाज और देश की समृद्धि की कामना की। बुजुर्गों ने बच्चों को कार्तिक स्नान की परंपरा और इसके धार्मिक महत्व के बारे में बताया। कार्तिक पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर देवरिया के घाटों ने आस्था, भक्ति और अनुशासन की मिसाल पेश की। सरयू की लहरों संग गूंजती श्रद्धा की ध्वनि ने पूरे जिले को भक्ति के रंग में रंग दिया।