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 देवरिया में होगा विश्व भोजपुरी सम्मेलन: 13–14 दिसंबर को सजेगा ‘संस्कृति पर्व 25

Published on: December 11, 2025
World Bhojpuri Conference will be held in Deoria

द देवरिया न्यूज़,देवरिया : देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के तहत उत्तर प्रदेश द्वारा 13 और 14 दिसंबर को दो दिवसीय ‘संस्कृति पर्व 25’ का आयोजन किया जाएगा। यह भव्य कार्यक्रम राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया में होगा, जिसका उद्देश्य भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना है।

आयोजन समिति ने इसे भोजपुरी अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। संयोजक एवं विश्व भोजपुरी सम्मेलन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह अधिवेशन उसी ऐतिहासिक धरती पर हो रहा है, जहाँ 1995 में पंडित विद्यानिवास मिश्र ने विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना कर भोजपुरी आंदोलन को नई ऊर्जा दी थी।

पहला दिन: उद्घाटन सत्र और लोकरंग कार्यक्रम

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली के सांसद, अभिनेता एवं गायक मनोज तिवारी ‘मृदुल’ शामिल होंगे। पहले दिन के लोकरंग कार्यक्रम में कल्पना पटवारी, भरत शर्मा व्यास, शिल्पी राज और आलोक कुमार जैसे प्रसिद्ध कलाकार प्रस्तुति देंगे।

दूसरा दिन: ‘बतकही’ सत्र और कवि सम्मेलन

दूसरे दिन आयोजित होने वाले ‘बतकही’ सत्र में भोजपुरी की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य को लेकर बौद्धिक विमर्श होगा। इसके बाद कवि सम्मेलन एवं मुशायरा होगा, जिसमें डॉ. कमलेश राय, भालचंद्र त्रिपाठी, बादशाह प्रेमी, सुभाष यादव और भूषण त्यागी जैसे कवि मंच पर होंगे। उर्दू और हिंदी के प्रसिद्ध शायर—शबीना अदीब, अज़हर इक़बाल, डॉ. मजीद देवबंदी और अफ़ज़ल इलाहाबादी—भी अपनी शायरी पेश करेंगे।

विशेष संबोधन

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्र वर्चुअल माध्यम से अधिवेशन को संबोधित करेंगे।

भोजपुरी को विश्वभाषा बताने का तर्क

सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने कहा कि भोजपुरी केवल लोकभाषा नहीं, बल्कि संस्कृत से उद्भूत एक वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने बताया कि 30 करोड़ से अधिक भाषाभाषियों के साथ यह वास्तव में एक विश्वभाषा है। अपनी शोध सामग्री का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भोजपुरी में 761 धातुएँ पाई गई हैं, जिनका संस्कृत व्याकरण से गहरा संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि भोजपुरी का इतिहास 7वीं सदी तक जाता है और गुरु गोरखनाथ से लेकर संत कबीर तक कई महापुरुषों ने इसी भाषा में रचनाएं की हैं।


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