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बांग्लादेश में सियासी हलचल तेज: क्या तारिक रहमान बनेंगे अगले प्रधानमंत्री?

Published on: December 25, 2025
Political turmoil intensifies in Bangladesh

द देवरिया न्यूज़,ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान करीब दो दशक बाद देश लौटने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह 25 दिसंबर को ढाका पहुंचेंगे। इसके साथ ही यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या फरवरी में संभावित आम चुनाव से पहले बीएनपी उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करेगी।


बीएनपी के भीतर मंथन, अंतिम फैसला खालिदा जिया के हाथ

न्यूज18 ने बीएनपी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया है कि पार्टी के भीतर “कई संभावनाओं” पर गंभीर चर्चा चल रही है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया को ही लेना है, जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद खालिदा जिया राजनीतिक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और रणनीतिक फैसलों में उनकी भूमिका अब भी निर्णायक है।


हिंसा और अस्थिरता के बीच वापसी

तारिक रहमान ऐसे समय में देश लौट रहे हैं, जब बांग्लादेश राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद पार्टी लगभग हाशिये पर चली गई है, जबकि जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बीएनपी के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बीएनपी के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि करीब 15 वर्षों बाद सत्ता में वापसी का अवसर हो सकता है।


समर्थन के साथ विरोध भी

बीएनपी के कुछ नेताओं का मानना है कि तारिक रहमान को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी को भावनात्मक बढ़त मिल सकती है। वहीं, पार्टी के भीतर ही कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वंशवाद की राजनीति का आरोप लग सकता है, खासकर तब जब युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विरोधी खेमे का कहना है कि केवल राजनीतिक विरासत के आधार पर मतदाताओं का समर्थन मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन पर विचार

रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी जमात-ए-इस्लामी से संभावित गठबंधन पर भी विचार कर रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अवामी लीग के कमजोर होने के बाद जमात के साथ गठबंधन कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, इससे जुड़े जोखिमों को लेकर पार्टी सतर्क है।

सूत्रों के मुताबिक, जमात के साथ गठबंधन से वैचारिक मतभेद, सरकार गठन के बाद संभावित टकराव और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा भी है। इसी वजह से बीएनपी इस मुद्दे पर फूंक-फूंककर कदम रख रही है।

तारिक रहमान की वापसी ने बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्या वह बीएनपी का प्रधानमंत्री चेहरा बनेंगे या पार्टी कोई दूसरा रास्ता चुनेगी—इसका फैसला आने वाले दिनों में साफ होगा।


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