द देवरिया न्यूज़,मॉस्को : यूक्रेन युद्ध में उलझे रूस ने श्रमशक्ति की कमी को पूरा करने के लिए भारत से बड़ी संख्या में कामगारों को बुलाने की योजना बनाई है। रूस ने इस वर्ष भारत से करीब 72 हजार प्रवासियों को रोजगार देने का फैसला किया है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए रूस में काम के नए अवसर खुलेंगे। हाल के महीनों में भारत और रूस के बीच श्रमिकों को लेकर कई समझौते हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान भी इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी थी।
हालांकि, रूस में काम करने गए कुछ भारतीयों को जबरन सेना में भेजे जाने के आरोपों ने चिंता भी बढ़ा दी है।
भारत को मिला 71,817 का कोटा
रूसी अखबार मोस्कोव्स्की कोम्सोमोलेट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने वर्ष 2025 के लिए विदेशी कामगारों का कुल कोटा 2.35 लाख तय किया है। इसमें भारत को आधिकारिक तौर पर 71,817 कामगारों का कोटा दिया गया है। हालांकि नई दिल्ली और मुंबई के सूत्रों का कहना है कि भारत से आवेदन करने वालों की संख्या के मुकाबले यह कोटा काफी कम है। कुछ रिपोर्ट्स में रूस द्वारा 10 लाख तक भारतीयों को वीजा देने के दावे भी किए गए थे, लेकिन रूसी मंत्रालय ने इन अटकलों को अवास्तविक बताते हुए खारिज कर दिया है।
पुतिन के प्रतिनिधि ने दिए आंकड़े
रूसी राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि बोरिस टिटोव ने बताया कि कम से कम 42 हजार भारतीय मॉस्को और अन्य बड़े रूसी शहरों में काम करने आएंगे। उन्होंने कहा कि अंतिम संख्या अभी तय नहीं है, लेकिन यह 40 हजार से कम नहीं होगी। टिटोव के अनुसार, रूस में भारतीय कामगारों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
वर्ष 2022 में: 8,000 भारतीयों को परमिट
वर्ष 2023 में: 14,000
वर्ष 2024 में: 36,000
ये आंकड़े दिखाते हैं कि बीते तीन वर्षों में रूस आने वाले भारतीय कामगारों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है।
सेना में भर्ती को लेकर चिंता
बोरिस टिटोव ने कहा कि भारत रूस की लेबर कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारतीयों की मेहनत और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि दुबई जैसे शहरों के विकास में भारतीय कामगारों और डेवलपर्स का बड़ा योगदान रहा है।
हालांकि, कुछ भारतीय नागरिकों ने आरोप लगाए हैं कि रूस-भारत लेबर एग्रीमेंट का इस्तेमाल कर रूसी अधिकारी उन्हें यूक्रेन युद्ध में जबरन भर्ती कर रहे हैं। ऐसे मामलों के सामने आने से भारत में चिंता बढ़ी है। फिलहाल, रूस में रोजगार के अवसर भारतीयों के लिए आकर्षक जरूर हैं, लेकिन सुरक्षा और सैन्य भर्ती से जुड़ी आशंकाओं को लेकर दोनों देशों के बीच स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था की मांग भी तेज हो रही है।
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