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स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने नहीं किए हस्ताक्षर, कांग्रेस ने बताई वजह

Published on: February 11, 2026
No confidence against Speaker Om Birla

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं में विपक्ष के नेता का स्पीकर को हटाने की मांग वाली याचिका पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता, इसी वजह से राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव से खुद को अलग रखा।

विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया?

दरअसल, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को “बोलने की अनुमति नहीं देने” और कांग्रेस की महिला सांसदों के साथ सदन में कथित तौर पर अनुचित स्थिति पैदा होने के आरोपों को लेकर विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया। इसी के तहत मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को प्रस्ताव से जुड़ा नोटिस सौंपा गया।

100 से ज्यादा सांसदों के हस्ताक्षर

इस अविश्वास प्रस्ताव पर 100 से अधिक विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, पार्टी के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश, सांसद मोहम्मद जावेद समेत अन्य नेताओं ने यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा।
इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने समर्थन दिया है, हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है।

सदन में बना हुआ है गतिरोध

बीते 2 फरवरी से लोकसभा में लगातार गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके अलावा, सदन की अवमानना के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने को लेकर भी विपक्ष नाराज है।

विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में उन्हें बोलने से रोका जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के नेताओं को बिना किसी रोक-टोक के अपनी बात रखने की छूट दी जा रही है। इसी आरोप के आधार पर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, हालांकि इस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने से सियासी चर्चा और तेज हो गई है।


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