द देवरिया न्यूज़,सियोल : दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने पहले स्वदेशी 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट KF-21 ‘बोरामे’ को औपचारिक रूप से पेश कर दिया है। कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (KAI) ने 25 मार्च 2026 को इसे दक्षिणी ग्योंगसांग प्रांत के सचियोन स्थित उत्पादन केंद्र में प्रदर्शित किया। खास बात यह है कि पहली उड़ान के कुछ ही वर्षों के भीतर इस विमान को सार्वजनिक रूप से पेश कर दिया गया, जिससे कोरिया की रक्षा तकनीक में तेजी साफ नजर आती है।
क्या है KF-21 फाइटर प्रोग्राम?
KF-21 परियोजना की नींव साल 2001 में रखी गई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति किम डे-जुंग ने स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, इस प्रोग्राम को असली गति 2016 के बाद मिली।
- 2021 में इसका पहला प्रोटोटाइप सामने आया
- 2022 में इसने पहली उड़ान भरी
- और अब 2026 में इसे औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया
यह विकास यात्रा दिखाती है कि दक्षिण कोरिया ने योजनाबद्ध तरीके से अपने डिफेंस सेक्टर को मजबूत किया है।
KF-21 की प्रमुख खूबियां
KF-21 को 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट माना जा रहा है, जो चौथी और पांचवीं पीढ़ी के विमानों के बीच की तकनीकी खाई को पाटता है।
- यह दो सीटों वाला आधुनिक मल्टी-रोल फाइटर है
- उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों से लैस है
- स्टील्थ फीचर्स सीमित रूप में मौजूद हैं
- लागत के मामले में F-35 जैसे फाइटर से सस्ता बताया जा रहा है
हालांकि इसे पूरी तरह पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं कहा गया है, लेकिन इसकी क्षमताएं उस स्तर के काफी करीब मानी जा रही हैं।
राफेल से तुलना
भारत की वायुसेना पहले से फ्रांस निर्मित राफेल जैसे 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट का इस्तेमाल कर रही है। दक्षिण कोरिया का दावा है कि KF-21 प्रदर्शन के मामले में राफेल और यूरोफाइटर टाइफून से बेहतर हो सकता है। KAI के प्रमुख कांग गू-यंग के अनुसार, KF-21 को सिर्फ 4.5 जेनरेशन कहना इसकी क्षमताओं का कम आकलन है।
भारत का AMCA प्रोजेक्ट
जहां दक्षिण कोरिया KF-21 को उत्पादन के चरण तक पहुंचा चुका है, वहीं भारत अभी अपने AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम है, जो अभी विकास के चरण में है।
अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी
KF-21 प्रोग्राम में शुरुआत में इंडोनेशिया भी शामिल था, जिसकी 20% हिस्सेदारी थी, हालांकि आर्थिक कारणों से उसकी भागीदारी कम हो गई है। इसके बावजूद इंडोनेशिया संभावित खरीदार बना हुआ है।
इसके अलावा UAE, सऊदी अरब, फिलीपींस और पोलैंड जैसे कई देशों ने भी इस फाइटर जेट में रुचि दिखाई है।
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