द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद पाकिस्तान में जिस आशंका की चर्चा थी, वह अब सच होती नजर आ रही है। भारत जल्द ही जम्मू और कश्मीर की दो प्रमुख नदियों—झेलम और चिनाब—से जुड़े अहम जल परियोजनाओं पर काम शुरू करने जा रहा है। ये वही प्रोजेक्ट हैं जो दशकों से सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) की वजह से अटके हुए थे। इनके शुरू होने से जम्मू और कश्मीर में पानी की गंभीर समस्या को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस बीच पाकिस्तान सिंधु जल संधि की शर्तों को बनाए रखने के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) जाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत ने जमीनी स्तर पर कदम बढ़ाकर उसकी रणनीति को झटका दे दिया है।
झेलम–चिनाब परियोजनाओं पर जल्द शुरू होगा काम
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद लंबे समय से लंबित जल परियोजनाओं पर अब तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने जिन दो प्रमुख प्रोजेक्ट का जिक्र किया, वे हैं—
जम्मू शहर को पानी की आपूर्ति के लिए अखनूर के पास चिनाब नदी से पानी उठाने की योजना।
कश्मीर में झेलम नदी के जल प्रबंधन के लिए सोपोर के पास तुलबुल नेविगेशन बैराज का निर्माण।
पहले क्यों अटके थे ये प्रोजेक्ट
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर विधानसभा को बताया कि सिंधु जल संधि के चलते इन परियोजनाओं पर काम करना पहले लगभग नामुमकिन था। उन्होंने कहा,
“हमने ये प्रस्ताव एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) को दिए थे, लेकिन सिंधु जल समझौते की वजह से उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी और ये प्रोजेक्ट बर्बाद हो गए।”
उन्होंने आगे कहा कि अब जब संधि को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, तो केंद्र सरकार के साथ मिलकर इन दोनों योजनाओं पर आगे बढ़ा जा रहा है।
पहलगाम हमले के बाद निलंबित हुई सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की नदियों का पानी पाकिस्तान तक निर्बाध बहने की व्यवस्था थी। लेकिन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इस संधि को हमेशा के लिए निलंबित करने का फैसला किया।
उमर अब्दुल्ला लंबे समय से इस संधि को “सबसे अनुचित समझौता” बताते रहे हैं और उनका कहना है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू और कश्मीर के लोगों को हुआ।
क्या है तुलबुल नेविगेशन बैराज परियोजना
तुलबुल नेविगेशन बैराज परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक की शुरुआत में की गई थी और 1984 में इस पर काम भी शुरू हो गया था। इसका उद्देश्य सोपोर में वुलर झील के पास ड्रॉप गेट बनाकर झेलम नदी के बहाव को नियंत्रित करना था, जिससे जल परिवहन और बिजली उत्पादन—दोनों को लाभ मिल सकता था।
हालांकि, पाकिस्तान की आपत्ति के बाद 1987 में इस परियोजना का काम रोक दिया गया।
जम्मू की चिनाब जल आपूर्ति योजना
जम्मू शहर के लिए चिनाब जल आपूर्ति योजना भी एक पुरानी और अहम परियोजना है। इसके तहत अखनूर के पास से चिनाब नदी का पानी उठाकर जम्मू शहर और आसपास के इलाकों तक पहुंचाया जाना है। फिलहाल जम्मू को तवी नदी से पानी मिलता है, जो बढ़ती आबादी और मांग को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रही है।
इन दोनों परियोजनाओं पर काम शुरू करने की तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब पाकिस्तान भारत के सिंधु जल संधि निलंबन के फैसले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चुनौती देने की योजना बना रहा है। ऐसे में भारत का यह कदम जम्मू-कश्मीर के लिए तो राहत भरा है ही, साथ ही क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश देता है।
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