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25 नवंबर को अयोध्या में इतिहास रचेगा राम मंदिर: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे धर्म ध्वज स्थापना, संतों को भेजे गए निमंत्रण पत्र में गुप्त कोड

Published on: November 4, 2025
History in Ayodhya on 25th November

द देवरिया न्यूज़ : अयोध्या नगरी एक बार फिर विश्व का केंद्र बनने जा रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूरी तरह तैयार हो चुका है और अब इसका अगला अध्याय इतिहास रचने वाला है। 25 नवंबर 2025 का दिन अयोध्या के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होने जा रहा है। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का संदेश पूरे विश्व को देंगे और धर्म ध्वज की स्थापना करेंगे।

यह दिन अपने आप में अद्भुत संयोग लिए हुए है — इस दिन विवाह पंचमी भी है और मंगलवार, जो हनुमान जी का पवित्र दिवस माना जाता है। ऐसे शुभ योग में होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है।


संत-महंतों को भेजे गए निमंत्रण पत्र

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या के संत-महंतों को ध्वजारोहण समारोह के लिए निमंत्रण पत्र भेजे जा रहे हैं। इन निमंत्रण पत्रों में कुछ विशेष नियमों और एक गुप्त कोड का उल्लेख किया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और पहचान सुनिश्चित की जा सके।

निमंत्रण पत्र के अनुसार, 25 नवंबर को सभी अतिथियों को ‘रामपथ’ स्थित बिरला धर्मशाला के सामने बने ‘रामानंद द्वार’ से प्रवेश दिया जाएगा।

  • प्रवेश का समय सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक रहेगा।

  • 10:00 बजे के बाद प्रवेश द्वार बंद कर दिया जाएगा।

  • सभी अतिथियों को अपने निमंत्रण पत्र के साथ आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा।

यह व्यवस्था सुरक्षा और शुचिता को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि कार्यक्रम सुचारु और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।


पहला निमंत्रण परमहंस आचार्य को

इस पवित्र आयोजन का पहला निमंत्रण तपस्वी जी की छावनी के जगद्गुरु परमहंस आचार्य को मिला है। निमंत्रण पत्र प्राप्त करने के बाद परमहंस आचार्य ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षण उनके जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण और भावनात्मक पल है।

उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा —

“यह अवसर केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह आयोजन 500 वर्षों के लंबे संघर्ष की पूर्णता का क्षण है। श्रीराम मंदिर का निर्माण न केवल अयोध्या, बल्कि पूरे भारत की आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक है।”

परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वे “युग पुरुष” हैं जिन्होंने सनातन संस्कृति के गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भूमि पूजन, फिर प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई, और अब उनके ही हाथों धर्म ध्वज की स्थापना होना, सनातन संस्कृति की सर्वोच्च गौरवगाथा का प्रतीक है।”


भक्ति, आस्था और गौरव का संगम बनेगा आयोजन

25 नवंबर का यह आयोजन न केवल अयोध्या बल्कि पूरे देश के लिए श्रद्धा, आस्था और गौरव का उत्सव होगा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल समेत कई प्रमुख संत, धर्माचार्य और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

अयोध्या प्रशासन ने इस दिन के लिए विशेष सुरक्षा और व्यवस्था योजना तैयार की है। राम मंदिर परिसर, रामपथ और आसपास के क्षेत्रों को फूलों, दीपों और पारंपरिक सजावट से सजाया जा रहा है।


धर्म ध्वज स्थापना: नई युग की शुरुआत

‘धर्म ध्वज स्थापना’ केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह अयोध्या के गौरवशाली अध्याय की पूर्णता का प्रतीक है। यह ध्वज उस विश्वास, संघर्ष और एकता का प्रतीक होगा जो करोड़ों राम भक्तों ने सदियों तक बनाए रखा।

आयोजन से जुड़े संतों का कहना है कि यह दिन 500 वर्षों के संघर्ष, बलिदान और प्रतीक्षा का फल है। जब रामलला का भव्य मंदिर पूरी तरह तैयार हो गया है, तो धर्म ध्वज की स्थापना के साथ नए युग का आरंभ होगा — “राम राज्य” के आदर्शों पर आधारित समाज निर्माण का संकल्प।”


अयोध्या में उमड़ेगी श्रद्धा की बयार

25 नवंबर को अयोध्या एक बार फिर आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति के उल्लास में सराबोर होगी। पूरा नगर दीपों की रोशनी, भजन-संकीर्तन और जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजेगा।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य के शब्दों में —

“यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वह क्षण है जब इतिहास स्वयं रामधाम की धरती पर झुककर प्रणाम करेगा।”


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