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बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंदू व्यापारी की हत्या, मैमनसिंह में दुकान के अंदर चाकू मारकर कत्ल

Published on: February 11, 2026
Hindus before elections in Bangladesh

द देवरिया न्यूज़,ढाका। बांग्लादेश में चुनाव से पहले एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है। सोमवार देर रात मैमनसिंह जिले में एक हिंदू व्यापारी की उसकी ही दुकान के अंदर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान 62 वर्षीय सुशेन चंद्र सरकार के रूप में हुई है, जो साउथकांडा के रहने वाले थे।

सुशेन चंद्र सरकार चावल के व्यापारी थे और त्रिशाल उपजिला के बोगरा बाजार में उनकी ‘मेसर्स भाई भाई एंटरप्राइज’ नाम से दुकान थी। इस घटना के बाद भारत में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

दुकान में घुसकर हमला, हत्या के बाद फरार हुए हमलावर

मैमनसिंह जिला पुलिस के अनुसार, यह वारदात रात करीब 11 बजे हुई। सुशेन चंद्र सरकार उस वक्त अपनी दुकान के अंदर मौजूद थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया। हत्या के बाद हमलावरों ने दुकान का शटर गिरा दिया और शव को अंदर ही छोड़कर फरार हो गए। बाद में स्थानीय लोगों ने जब दुकान का शटर आधा खुला देखा तो उन्हें शक हुआ। अंदर झांकने पर सुशेन चंद्र सरकार का खून से लथपथ शव पड़ा मिला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस का बयान, जांच शुरू

त्रिशाल पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज मुहम्मद फिरोज हुसैन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि हत्या के पीछे का स्पष्ट मकसद अभी सामने नहीं आया है, हालांकि शुरुआती जांच में यह मामला लूट से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। मोहम्मद यूनुस सरकार के कार्यकाल के दौरान ऐसी घटनाओं में तेजी आई है, हालांकि सरकार इन आरोपों को व्यवस्थित उत्पीड़न मानने से इनकार करती रही है।

इससे पहले 18 जनवरी 2026 को फैक्ट्री मजदूर दीपू चंद्र दास की ईशनिंदा के झूठे आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद उनका शव सरेआम जला दिया गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। ताजा घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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