द देवरिया न्यूज़,देश/विदेश : वैश्विक राजनीति में बदलाव केवल व्यक्तियों से नहीं, बल्कि व्यवस्थागत कारणों और नेताओं—दोनों के संयुक्त प्रभाव से होता है। अंतरराष्ट्रीय प्रणाली, आर्थिक हालात और सैन्य शक्ति जैसे व्यवस्थागत कारक लंबे समय तक वैश्विक दिशा तय करते हैं, जबकि राजनेताओं का प्रभाव अक्सर सीमित समय के लिए, विशेषकर संकट के दौर में, निर्णायक साबित होता है।
नेतृत्व का तात्कालिक प्रभाव
वर्तमान दौर में कुछ नेताओं का असर वैश्विक राजनीति पर विशेष रूप से दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वर्ष सबसे प्रभावशाली वैश्विक व्यक्तित्वों में शामिल रहे। उन्होंने अमेरिका की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश की।
ट्रंप की विदेश और घरेलू नीति
डोनाल्ड ट्रंप ने विदेश नीति में “देना–लेना” की रणनीति अपनाई। उन्होंने पारंपरिक गठबंधनों पर सवाल उठाए, कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अमेरिका को बाहर निकाला और बहुपक्षीय सहयोग के बजाय द्विपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता दी। चीन से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी रही।
आर्थिक मोर्चे पर ट्रंप ने संरक्षणवादी नीतियां अपनाईं और टैरिफ का सहारा लिया। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ताकत मजबूत हुई है, लेकिन कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि ये नीतियां लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। घरेलू स्तर पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कटौती या बदलाव को लेकर भी ट्रंप की नीतियों पर तीखी बहस रही—समर्थक इसे सरकारी दखल में कमी मानते हैं, जबकि आलोचक कमजोर वर्गों के लिए जोखिम बताते हैं।
चीन की बढ़ती वैश्विक भूमिका
इस दौरान चीन ने भी व्यापार, तकनीक, सैन्य शक्ति और कूटनीति के जरिए अपना वैश्विक प्रभाव बढ़ाया। राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और विकास परियोजनाओं के माध्यम से ग्लोबल साउथ के देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए। ताइवान, दक्षिण चीन सागर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चीन का रुख सख्त बना रहा, जो उसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
पुतिन की मजबूत पकड़
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के बावजूद सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी। रूस में राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण जारी रहा और विपक्ष के लिए सीमित स्थान बचा। विदेश नीति में पुतिन ने पश्चिमी देशों से टकराव बनाए रखते हुए गैर-पश्चिमी देशों के साथ संबंध मजबूत किए। 2025 तक यह स्पष्ट हो गया कि यूक्रेन युद्ध का समाधान काफी हद तक रूस की शर्तों पर निर्भर करता दिख रहा है।
नरेंद्र मोदी का नेतृत्व
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस वैश्विक नेतृत्व सूची में प्रमुख स्थान रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और टैरिफ दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने स्थिर प्रदर्शन किया। सुरक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
घरेलू स्तर पर मोदी सरकार ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और डिजिटल परिवर्तन पर जोर दिया। विदेश नीति में भारत ने संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाया। बहुध्रुवीय होती दुनिया में भारत ने G-20, BRICS, Quad और इंडो-पैसिफिक साझेदारियों के जरिए खुद को एक जिम्मेदार और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया।
वैश्विक राजनीति में दीर्घकालिक दिशा व्यवस्थागत कारक तय करते हैं, लेकिन नेताओं की भूमिका संकट के समय निर्णायक हो जाती है। मौजूदा दौर में ट्रंप, शी चिनफिंग, पुतिन और नरेंद्र मोदी जैसे नेता अंतरराष्ट्रीय राजनीति को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर रहे हैं, जो आने वाले वर्षों की वैश्विक व्यवस्था की नींव रखेंगे।
(लेखक: किंग्स कॉलेज, लंदन में प्रोफेसर)
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