द देवरिया न्यूज़ : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। शिक्षक संघ ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर गंभीर आपत्ति जताई और कहा कि यह पहले से नियुक्त शिक्षकों के साथ अन्याय है। संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षक जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्र हुए और केंद्र व राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
पुरानी नियुक्ति प्रक्रिया के आधार पर टीईटी छूट की मांग
शिक्षक संघ का कहना है कि वर्ष 2009 में लागू हुए ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम’ (RTE Act) से पहले, कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्तियाँ सेवा नियमावली 1981 के अंतर्गत की गई थीं। ऐसे में उनके लिए टीईटी को पुनः अनिवार्य बनाना अनुचित है। संघ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने शिक्षकों की नियुक्ति शर्तों और वरिष्ठता में एकतरफा बदलाव कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए।
टीईटी न पास करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अफवाह से असंतोष
शिक्षकों में यह भ्रम फैल गया है कि यदि वे दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण नहीं करते, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। संघ ने इस स्थिति को भ्रमपूर्ण और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला बताया। संघ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो शिक्षक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख नाम शामिल
ज्ञापन सौंपने वाले शिक्षकों में संघ के जिला महामंत्री नंदलाल, मंडल अध्यक्ष अशोक सिंह, मंडल महामंत्री अशरफ खान, डॉ. हेमंत शुक्ला समेत सैकड़ों शिक्षक मौजूद थे।
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