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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से चीन को बड़ा झटका, टैरिफ कटौती ने बदली वैश्विक व्यापार की तस्वीर

Published on: February 5, 2026
China from India-US trade deal
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच हुई नई ट्रेड डील ने वैश्विक व्यापार समीकरणों में बड़ा बदलाव ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही बीते महीनों में भारत को टैरिफ और सीजफायर जैसे मुद्दों में उलझाए रखते नजर आए हों, लेकिन जब ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान हुआ तो इसका सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ा। इस समझौते ने भारत को अमेरिकी बाजार में ऐसी बढ़त दिला दी है, जिससे चीन के लिए प्रतिस्पर्धा और मुश्किल हो गई है।
इस डील के तहत भारत पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव सिर्फ दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रावधान ऐसे हैं जो भारत को दीर्घकालिक लाभ और चीन को रणनीतिक नुकसान पहुंचाते हैं। अब तक अमेरिका के साथ व्यापार में चीन, ऊंचे टैरिफ के बावजूद भारत से बेहतर स्थिति में था, लेकिन इस समझौते के बाद परिस्थितियां पूरी तरह भारत के पक्ष में झुक गई हैं।
चीन के अधिकांश निर्यात पर अमेरिका अब भी भारी टैरिफ लगाए हुए है। आंकड़ों के अनुसार, चीन के करीब 99 प्रतिशत निर्यात पर 37.5 से 55 प्रतिशत तक टैरिफ लागू है, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक उत्पाद 55 प्रतिशत शुल्क के दायरे में आते हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पर तो यह टैरिफ लगभग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसके मुकाबले भारत को अब अमेरिकी बाजार में करीब 50 प्रतिशत तक का तुलनात्मक लाभ मिलने जा रहा है।
इस ट्रेड डील का सबसे बड़ा फायदा भारत के एमएसएमई सेक्टर को होगा। भारत के कुल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है, जिसमें से करीब 60 प्रतिशत योगदान छोटे और मझोले उद्योगों का है। पहले 50 प्रतिशत टैरिफ का सबसे ज्यादा असर इसी सेक्टर पर पड़ा था। अब नई डील के तहत कई उत्पादों पर टैरिफ शून्य या बेहद कम कर दिए गए हैं, जिससे एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। यही वह क्षेत्र है, जहां चीन का वैश्विक स्तर पर दबदबा रहा है, लेकिन अब यह चुनौती में पड़ता दिख रहा है।
इसके अलावा, भारत को अमेरिकी बाजार में सस्ते इलेक्ट्रिक व्हीकल बेचने का रास्ता भी साफ हुआ है। इससे चीन की EV इंडस्ट्री को सीधा झटका लगने की संभावना है। वहीं, क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका बढ़ाई जा रही है। अमेरिका पहले ही भारत को अपनी क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति का हिस्सा बना चुका है, जिससे चीन की सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ गया है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने न सिर्फ भारत की स्थिति मजबूत की है, बल्कि चीन के लिए वैश्विक व्यापार में नई और कठिन चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह समझौता आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।

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