मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि जब दिल्ली हाईकोर्ट पहले से ही इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है, तो याचिकाकर्ता को वहीं अपनी शिकायतें रखनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट में समाधान नहीं निकलता है, तो याचिकाकर्ता दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो की उड़ानें रद्द होने और यात्रियों को हो रही परेशानियों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति उड़ानें रद्द होने के कारणों और उससे यात्रियों पर पड़ रहे प्रभाव की समीक्षा करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब मामला पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट और DGCA के संज्ञान में है, तो फिलहाल वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट जता चुका है नाराजगी
गौरतलब है कि 10 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से उत्पन्न स्थिति पर केंद्र सरकार से सवाल किए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि समय रहते कार्रवाई न होने के कारण लाखों यात्री फंस गए और अन्य एयरलाइंस ने इसका फायदा उठाते हुए मनमाने किराए वसूले। हाईकोर्ट में दायर याचिका में यात्रियों को राहत, मदद और रिफंड दिलाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
DGCA ने बनाई विशेषज्ञ समिति
इंडिगो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि DGCA ने 5 दिसंबर को विशेषज्ञ समिति गठित की है, जो उड़ानें रद्द होने के पीछे के कारणों और यात्रियों को हुई असुविधा की जांच करेगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही में शामिल होकर अपनी सभी दलीलें रख सकते हैं।
यात्रियों की परेशानी बनी बड़ी चिंता
याचिकाकर्ता नरेंद्र मिश्रा ने कोर्ट में दलील दी कि उड़ानें रद्द होने से यात्री भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने माना कि यह गंभीर मुद्दा है, लेकिन चूंकि दिल्ली हाईकोर्ट पहले से इस मामले को देख रहा है, इसलिए वहीं इसका समाधान तलाशा जाना उचित होगा।
उल्लेखनीय है कि इंडिगो ने पायलटों की ड्यूटी और उड़ान संचालन से जुड़े नियमों में बदलाव का हवाला देते हुए सैकड़ों उड़ानें रद्द की हैं, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।