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राजीव गांधी पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का आरोप, कांग्रेस बोली – ‘पत्नी की संपत्ति पर जवाब दें सांसद’

Published on: October 18, 2025
BJP on Rajiv Gandhi
द देवरिया न्यूज़ ,नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में शुक्रवार को जुबानी जंग का नया दौर शुरू हो गया, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर गंभीर आरोप लगाया। दुबे ने सोशल मीडिया पर एक पुराना दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया कि राजीव गांधी 1970 के दशक में स्वीडन की एक सैन्य कंपनी के एजेंट थे, और उन्होंने उस समय हथियारों की खरीद-फरोख्त में दलाली की थी।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने खुद निशिकांत दुबे और उनकी पत्नी की संपत्ति में हुई वृद्धि को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं के बीच यह राजनीतिक टकराव अब सोशल मीडिया और लोकपाल के दायरे तक पहुंच गया है।

राजीव गांधी पर निशिकांत दुबे का दावा

निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक कथित दस्तावेज साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा —

“कांग्रेस को नैतिकता पर भाषण देने से पहले अपने अतीत की सच्चाई देखनी चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1970 में स्वीडिश डिफेंस कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। हथियार सौदों में उनका नाम आने के बावजूद कांग्रेस ने सब कुछ छिपा दिया।”

दुबे ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन जब बात खुद के शीर्ष नेतृत्व की आती है, तो वह तथ्यों को दबाने की कोशिश करती है।

सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार: ‘पहले अपनी पत्नी की संपत्ति पर जवाब दें’

भाजपा सांसद के इस बयान से पहले कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने निशिकांत दुबे और उनकी पत्नी की संपत्ति में आए बड़े उछाल को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने लोकपाल को दी गई एक शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि दुबे परिवार की संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है।
श्रीनेत ने आरोप लगाया,
“साल 2009 में निशिकांत दुबे की पत्नी की संपत्ति मात्र 50 लाख रुपये थी, जो अब 2024 में बढ़कर 32 करोड़ रुपये हो गई है। जबकि सांसद की आय में इतनी वृद्धि नहीं हुई है। सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी संपत्ति आई कहां से?”

लोकपाल में शिकायत, चार हफ्ते में देना होगा जवाब
कांग्रेस की शिकायत पर लोकपाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए निशिकांत दुबे को चार सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। शिकायत में कहा गया है कि सांसद की घोषित आय और उनकी पत्नी की बढ़ी हुई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर है, जो वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करता है।
दुबे के 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी पत्नी के पास 28.94 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 6.48 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। वहीं, दुबे के पास 1.2 करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि हलफनामे में जिस व्यक्ति “अभिषेक झा” से कर्ज लेने का दावा किया गया है, उसने खुद यह कहा कि उसने दुबे की पत्नी को कोई कर्ज नहीं दिया। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह गंभीर मामला है और भाजपा सांसद को इस पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज

राजीव गांधी पर आरोप लगाकर निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सांसद अपने ऊपर लगे आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी सूत्रों ने कहा कि जब उनकी पत्नी की संपत्ति पर सवाल उठाए गए, तो उन्होंने एक पुराने मुद्दे को उठाकर राजनीतिक बचाव करने का प्रयास किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों दलों के बीच यह विवाद केवल व्यक्तिगत बयानबाजी नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव से पहले नैरेटिव सेट करने की कोशिश भी है। भाजपा जहां कांग्रेस के नेतृत्व पर पुराने घोटालों का ठीकरा फोड़ना चाहती है, वहीं कांग्रेस भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के मुद्दे पर भाजपा को घेरने में लगी है।

दुबे का पलटवार: ‘कांग्रेस नैतिकता का ठेकेदार न बने’

कांग्रेस के हमले पर निशिकांत दुबे ने दोबारा प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,

“कांग्रेस पार्टी को दूसरों की संपत्ति पर सवाल उठाने से पहले अपने परिवार की संपत्ति और दलाली की फाइलें खोलनी चाहिए। राजीव गांधी के समय से लेकर आज तक कांग्रेस ने केवल कमीशनखोरी की संस्कृति को बढ़ावा दिया है।”

दुबे ने यह भी कहा कि उनकी संपत्ति और चुनावी हलफनामे से जुड़े सारे दस्तावेज लोकपाल और चुनाव आयोग के पास हैं, और वह समय आने पर हर सवाल का जवाब देंगे।
राजनीतिक तौर पर यह विवाद अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है। लोकपाल में शिकायत के बाद मामला औपचारिक जांच की दिशा में बढ़ गया है। वहीं, राजीव गांधी पर लगाए गए पुराने आरोपों ने फिर से कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी तल्खी को बढ़ा दिया है।
जहां भाजपा अतीत के मुद्दों को उठाकर कांग्रेस की नैतिक छवि को चुनौती दे रही है, वहीं कांग्रेस वर्तमान में भाजपा सांसद की आर्थिक पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है।
आने वाले दिनों में यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद से लेकर लोकपाल तक इसकी गूंज सुनाई देने की संभावना है।

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