Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

सिर्फ 146 दिन चली 17वीं बिहार विधानसभा: पांच साल में सबसे कम बैठकें, सभी विधेयक बिना समीक्षा के पास

Published on: October 9, 2025
bihar-assembly-17th-term-sat-only-146-days-between-2020-2025-analysis-report

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एक अध्ययन रिपोर्ट ने सूबे की विधानसभा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS Legislative Research) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच 17वीं बिहार विधानसभा की कुल बैठकें सिर्फ 146 दिन हुईं — जो पिछले सभी कार्यकालों में सबसे कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में विधानसभा औसतन हर साल 29 दिन चली और हर दिन की बैठक करीब तीन घंटे की रही। यह संख्या देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं की तुलना में भी बेहद कम है।


🔹 ऐतिहासिक तुलना में भारी गिरावट

स्वतंत्रता के बाद पहली बिहार विधानसभा ने 391 दिन और दूसरी विधानसभा ने 434 दिन तक बैठक की थी। लेकिन इसके बाद बैठकों की संख्या लगातार घटती चली गई। 1980 से 1985 की आठवीं विधानसभा के दौरान यह घटकर 208 दिन रह गई थी। अब 17वीं विधानसभा में यह आंकड़ा 146 पर आकर रुक गया है, जो अब तक का सबसे न्यूनतम रिकॉर्ड है।


🔹 बिना समीक्षा के पारित हुए सभी विधेयक

रिपोर्ट के अनुसार, 17वीं विधानसभा के दौरान कुल 78 विधेयक (Bills) पारित किए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से एक भी विधेयक समीक्षा या किसी समिति (Committee) के पास विचार के लिए नहीं भेजा गया।
सभी विधेयक उसी दिन पास कर दिए गए, जिस दिन उन्हें सदन में पेश किया गया था।

तमिलनाडु में विजय रैली हादसे की सीबीआई जांच की मांग, भाजपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे —

  • बिहार सार्वजनिक परीक्षा (अवैध साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024

  • बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक, 2024

  • प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण, सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2025

इसके अलावा, वर्ष 2023 में दो विधेयक पारित किए गए थे जिनके तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव था। हालांकि, इन्हें पटना हाईकोर्ट ने जून 2024 में असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया।


🔹 सीमित चर्चा और खर्च समीक्षा

रिपोर्ट में बताया गया कि इस पांच साल के कार्यकाल के दौरान विधानसभा में वार्षिक बजट और मुख्य विभागों के खर्चों पर चर्चा तो हुई, लेकिन उसका समय बेहद सीमित रहा।
2020 से अब तक औसतन 9 दिन ही मंत्रालयों के खर्चों पर चर्चा हुई, जो कि लोकतांत्रिक विमर्श की दृष्टि से चिंताजनक माना जा रहा है।

मुंबई हमले पर पीएम मोदी का कांग्रेस पर निशाना, कहा– विदेशी दबाव में रोका गया था सेना का एक्शन


🔹 बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि में रिपोर्ट का महत्व

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब बिहार में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।
पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर 2025 को की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष — दोनों के लिए राजनीतिक बहस का विषय बनेगी, क्योंकि यह राज्य में विधानसभा की कार्य संस्कृति और जवाबदेही पर गहरा प्रश्न खड़ा करती है।


निष्कर्ष:
बिहार विधानसभा की कार्यवाही में इस तरह की गिरावट राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंता का विषय है।
जहां पहले विधायक जनता के मुद्दों पर विस्तृत बहस करते थे, वहीं अब विधेयक बिना समीक्षा के पास हो रहे हैं।
आगामी चुनाव में यह सवाल जरूर उठेगा कि आखिर बिहार विधानसभा की “बैठकें” इतनी कम क्यों रह गईं और क्या यह जनता के प्रतिनिधित्व की भावना के अनुरूप है?

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Read Also

Announcement of elections of five states

पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान, लेकिन SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल

Uddhav-Raj before BMC elections

बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव-राज ठाकरे साथ आए, सत्ताधारी गठबंधन पर तीखा हमला; संयुक्त घोषणा पत्र का ऐलान

Pune Municipal Corporation Elections

पुणे नगर निगम चुनाव: घड़ी सिंबल पर अटका एनसीपी गठबंधन, एमवीए ने तय किया सीट बंटवारा

Shubhendu Adhikari's allegation

शुभेंदु अधिकारी का आरोप: बंगाल में मृतक मतदाताओं के नाम हटाने से रोका जा रहा, टीएमसी ने दिया पलटवार

BJP leader Kapil on Rahul Gandhi

राहुल गांधी पर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का कटाक्ष: “तालाब में तमाशा करने वालों को जनमत ने डुबो दिया” — बेगूसराय में कांग्रेस को करारी हार

Bihar elections NDA's landslide victory

बिहार चुनाव: एनडीए की प्रचंड जीत—बीजेपी बनी नंबर 1, RJD-कांग्रेस ध्वस्त, PK का गुब्बारा फूटा | 5 बड़ी बातें

1 thought on “सिर्फ 146 दिन चली 17वीं बिहार विधानसभा: पांच साल में सबसे कम बैठकें, सभी विधेयक बिना समीक्षा के पास”

Leave a Reply